वर्ष 2018 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार अंद्राबी अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह में संक्षिप्त जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 15 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी के नेतृत्व वाले दुख्तारन-ए-मिल्लत (डीईएम) ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित करने वाली अधिसूचना को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। यूएपीए की धारा-तीन के तहत 30 दिसंबर 2004 को केंद्र द्वारा कश्मीर स्थित सभी महिला संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
विज्ञापन
वर्ष 2018 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार अंद्राबी अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। न्यायमूर्ति अनूप कुमार मेंदीरत्ता ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह में संक्षिप्त जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 15 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी। डीईएम ने अधिवक्ता निशा नरायण व शरीफ इकबाल के माध्यम से याचिका दायर कर प्रतिबंध के संबंध में जारी अधिसूचना की प्रति उपलब्ध कराने के साथ ही संगठन को प्रतिबंधित सूची को हटाने का निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में कहा गया कि संगठन को इस अधिसूचना के संबंध में पहली बार तब पता चला जब संगठन के सदस्य ने सूचना का अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी। वहीं, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने याचिका की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि डीईएम अनभिज्ञता का दिखावा करता है और आरटीआई के जवाब के आधार पर अदालत से तरीके से मांग कर रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता संगठन से संबंधित अधिसूचना यूएपीए अधिनियम के अध्याय-छह के तहत कवर किया गया है। जबकि, याचिकाकर्ता की तरफ से अध्याय-दो का संदर्भ गलत तरीके से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता है कि याचिकाकर्ता संगठन संसद के अधिनियम से अनजान था, जबकि इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतिकरण करने का अवसर मांगा गया था।