जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से दुखी कई संगठन व मंदिरों में रंगों की होली न खेलने का निर्णय लिया गया है। एनआईटी-2 स्थित श्री महारानी वैष्णोदेवी मंदिर में इस बार रंगों की होली नहीं मनाई जाएगी है। मंदिर के प्रधान जगदीश भाटिया ने बताया कि होली के दिन मंदिर में भजनों एवं यज्ञ का आयोजन होगा।
भाटिया ने कहा कि जाट आरक्षण के दौरान प्रदेश में हुई हिंसा से वह बेहद ही विचलित हैं। इस हिंसा में जिस प्रकार से जान माल की हानि हुई, वह दुर्भाग्यपूर्ण है।
भविष्य में प्रदेश में इस प्रकार की हिंसा की घटना घटित ना हो, इसके लिए वह भगवान से प्रार्थना करते हैं। भाटिया ने शहर की सभी सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से यह भी अपील की है कि वह रंगों की होली खेलने की बजाए फूलों की होली खेंले।
पंजाबी समाज के लोगों ने भी होली न मनाने का फैसला लिया है। शुक्रवार को एनआईटी-5 में आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों की एक बैठक हुई, जिसमें पंजाबी सामुहिक मंच बनाया गया। साथ ही पंजाबी समुदाय से होली न मनाने की अपील की गई। बैठक में रमेश भाटिया ने कहा कि जाट आंदोलन के दौरान हुए बवाल से समाज दुखी है। बैठक में रामसिंह आहूजा, बहादुर सिंह, राधा नरूला, सुंदर कूपर आदि मौजूद रहे।