यूके की महिला को इमिग्रेशन के कागजात पूरे नहीं होने पर गिरफ्तारी की धमकी देकर ठगी करने करने वाले तीन युवकों को आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया है।
युवकों ने फर्जी यूके के अधिकारी बनकर महिला को फोन कर उससे 1477 पाउंड की रकम मंगवा ली। आर्थिक अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त अनयेश राय ने बताया कि यूके निवासी अमरिताभ रॉय ने आर्थिक अपराध शाखा में ठगी की शिकायत की कि 27 अगस्त को उनकी पत्नी के मोबाइल पर एक फोन आया।
फोन करने वाले ने खुद को यूनाइटेड किंगडम बार्डर एजेंसी का अधिकारी बताया। उसने कहा कि उन लोगों ने भारत में इमिग्रेशन की औपचारिकता पूरी नहीं की है।
वेस्टर्न यूनियन से मंगवायी रकम
ऐसे में यूके में रहना गैरकानूनी है। इस पर कोई कार्रवाई न हो इसके लिए उन्हें जुर्माने के तौर पर 1477 पाउंड देने होंगे। फोन करने वाला उससे करीब चार घंटे तक बातचीत करता रहा।
इस दौरान उन लोगों ने वेस्टर्न यूनियन से रकम मंगवा ली। एक दिन बाद फिर से उन लोगों ने बेल बांड के तौर पर 13 सौ पाउंड की मांग की। इस पर महिला ने अपने पति को जानकारी दे दी।
सूचना मिलते ही अमरिताभ ने इसकी शिकायत आर्थिक अपराध शाखा में दी। पुलिस की टीम ने तिलक नगर स्थित कंपनी के कार्यालय पर निगरानी रखी और ब्रांच के ऑपरेटर पवन को हिरासत में लेकर पूछताछ की।
पवन ने माना कि तीनों पेमेंट इसी ब्रांच से हुई हैं। उसने बताया कि इसके लिए उसे फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले गौरव और अमन छावड़ा ने कहा था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर अमन को आनंद पर्वत व गौरव को करोलबाग से गिरफ्तार कर लिया।
साफ्टवेयर के जरिये करते थे ठगी
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन लोगों ने अपने कंप्यूटर में एक साफ्टवेयर डाला है, जिसके जरिये वह वीओआईपी कॉल करते थे।
फोन करने के दौरान पीड़ितों के मोबाइल पर यूके के बार्डर सिक्योरिटी कार्यालय का नंबर आता था। वह पीड़ितों की जानकारी नौकरी डॉट काम से लेते थे।
आरोपी डीयू के छात्र-
दिल्ली पुलिस के अनुसार अमन छाबड़ा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है। गौरव से मुलाकात होने के बाद वह इस धंधे से जुड़ा। गौरव को कॉल सेंटर में काम करने का अनुभव था।
गौरव भी डीयू से स्नातक है और कई कॉल सेंटर में काम कर चुका है। अमन ने कंसलटेंसी कंपनी खोली और उसमें 13 कंप्यूटर लगाए, जिसके जरिये वे ठगी को अंजाम देने लगे।