इस साल के रैमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और दिल्ली में अपना एनजीओ चलाने वाले अंशू गुप्ता का कहना है कि भिखारी केवल शहरों में ही दिखते हैं गांव में बहुत कम पाए जाते हैं।
इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि अगर शहर में भीख मांगने वालों से पूछें तो आप पाएंगे कि अपने गांव में वह अच्छा-खासा सम्मानित व्यक्ति है, लेकिन गांव की बदहाल हालत ने उसे शहर में भीख मांगने के लिए मजबूर कर दिया है।
जबकि शहरों में भीख मांगने का काम इतना सामान्य हो चुका है कि यहां रहने वाले लोग इसे रोजाना की जिंदगी का हिस्सा मानते हैं। बल्कि शहरों में तो यह इतनी सामान्य बात हो चुकी है कि अब यह एक संगठित पेशे की शक्ल अख्तियार कर चुका है।
इस पेशे की सच्चाई और इससे जुड़ी कमाई पर बना एक वीडियो फिलहाल इंटरनेट पर वायरल हो चुका है। 31 जुलाई को यू-ट्यूब पर पोस्ट किया गया यह वीडियो अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है।