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DTC ने अपनाई पैसा कमाने की तरकीब

Sat, 04 Jan 2014 10:55 AM IST
सीमा शर्मा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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नई दिल्ली में यात्रियों पर अधिक किराये का बोझ डाले बगैर भी डीटीसी मुनाफे में दौड़ सकता है। मुंबई की बेस्ट और बंगलूरू की बीएमटीसी की तर्ज पर डीटीसी भी खुद को घाटे से उबारेगा। सीएनजी के दाम बढ़ने के बाद डीटीसी प्रबंधन ने विज्ञापन, टिकट और डेली पास के आधार पर हर महीने 150 करोड़ तो साल भर में 1800 करोड़ रुपये कमाने की योजना तैयार कर ली है।
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योजना पर काम भी शुरू हो गया है। पिछले दिनों दिल्ली में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देशभर के लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रिपोर्ट पेश की, जिसमें सामने आया कि मुंबई की बेस्ट और बंगलूरू की बीएमटीसी मुनाफे में चल रही हैं। दोनों राज्यों के लोकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रबंधन ने टिकट व डेली पास के अलावा विज्ञापन को भी योजना में शामिल कर रखा है।

प्रबंधन ने दोनों राज्यों की ट्रांसपोर्ट योजनाओं पर वहां जाकर अध्ययन करते हुए उसकी तुलना डीटीसी से की। सूत्रों के अनुसार, अध्ययन टीम ने रिपोर्ट में लिखा है कि कुल बसों व यात्रियों के आधार पर डीटीसी को ट्रैफिक (टिकट और डेली पास) से 4 करोड़ रुपये का राजस्व प्रतिदिन व महीने में 120 करोड़ रुपये और नॉन ट्रैफिक (डिपो की दीवारों और बसों के अंदर व बाहर विज्ञापन लगाना) से प्रतिदिन एक करोड़ तो महीने में 30 करोड़ रुपये का मुनाफा होगा। इस तरह महीने में 150 करोड़ तो साल भर में 1800 करोड़ रुपये की कमाई होगी, जबकि अभी तक विज्ञापन योजना को डीटीसी इस्तेमाल ही नहीं कर रही है।
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रिपोर्ट सीनियर अधिकारियों ने सीएमडी को सौंप दी है, जिसके आधार पर डीटीसी प्रबंधन ने मार्केटिंग सेल बना दिया है। सेल का हेड जनरल मैनेजर एसआर कटारिया तो सीनियर मैनेजर आरएस मिन्हास उसके सदस्य बनाए गए हैं। सेल अब राजधानी के विभिन्न इलाकों में डिपो की पहचान करेगा, ताकि वहां विज्ञापन लगाकर काम शुरू किया जा सके।

गौरतलब है कि घाटे से उबरने के लिए 2012 में डीटीसी प्रबंधन ने किराया बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा था, जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने ठुकरा दिया था। हालांकि घाटे से उबारने के लिए डीटीसी दिल्ली पर्यटन विभाग को डिपो की खाली जगह बजट होटल बनाने के लिए लीज पर देने की भी योजना बना चुका है, जिस पर काम हो रहा है।

बस-ऑटो किराया बढ़ाने की मांग

दिल्ली में सीएनजी दरों में बढ़ोतरी को देखते हुए ऑटो रिक्शा संचालकों के साथ-साथ बस ऑपरेटर्स ने भी किराया वृद्धि की मांग शुरू कर दी है। प्राइवेट ट्रांसपोर्ट मजदूर महासंघ के अध्यक्ष राजेंद्र सोनी का कहना है कि मुख्यमंत्री ने दो-तीन दिन का टाइम मांगा था। अब तो एक सप्ताह होने वाला है। उन्होंने कहा कि या तो ऑटो रिक्शा का किराया बढ़ाया जाना चाहिए, या फिर सीएनजी की दरें वापस होनी चाहिए।

एसटीए ऑपरेटर्स एकता मंच के महासचिव श्यामलाल गोला ने बताया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और परिवहन मंत्री सौरभ भारद्वाज को पत्र लिखकर किराया बढ़ाने की मांग रखी है। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग ने 66/192ए की जो शक्तियां ट्रैफिक पुलिस को दी है, उसे वापस लेने की मांग भी की है। इस धारा का इस्तेमाल करके ट्रैफिक पुलिस चालकों को परेशान करती है।
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