कई प्रणालियों को किया जा रहा एकीकृत
रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) ने सीबीटीसी सिस्टम के तहत अलग-अलग प्रणालियों को एकीकृत किया जाता है। संचार आधारित इस तकनीक के जरिये नियंत्रण कक्ष में बैठकर ही मेट्रो का परिचालन संभव है। इस तकनीक की मदद से मजेंटा और पिंक लाइन पर चालक रहित मेट्रो का परिचालन किया जा रहा है। फेज-4 की तीनों कॉरिडोर पर इस तकनीक के जरिये ड्राइवरलेस मेट्रो का परिचालन किया जाएगा।
90 सेकेंड के अंतराल पर मिलेगी दूसरी मेट्रो
फेज-4 के कॉरिडोर पर मेट्रो नेटवर्क के विस्तार से यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। डीएमआरसी के मुताबिक, इसे देखते हुए मेट्रो की फ्रिक्वेंसी को भी बढ़ाना होगा। अलग-अलग लाइनों पर फिलहाल ढाई से पौने तीन मिनट के अंतराल पर मेट्रो सेवाएं उपलब्ध हैं। मेट्रो की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए फ्रिक्वेंसी भी बढ़ाई जाएगी। इसके बाद मेट्रो महज 90 सेकेंड के अंतराल पर उपलब्ध होगी। सभी लाइनों पर मेट्रो की उपलब्धता से यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी।
एनसीएमसी से यात्रा होगी और आसान, कई सुविधाएं मिलेंगी
नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) के लिए भी दिल्ली मेट्रो तकनीक में बदलाव किया जा रहा है। इसके साथ ही ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन (एएफसी) गेट को भी अपग्रेड किया जा रहा है। इस कार्ड का इस्तेमाल मेट्रो, बस, पार्किंग, मॉल्स सहित कई और जगहों पर किया जा सकेगा। पहले 2022 तक लागू किया जाना था, लेकिन कोविड-19 के कारण परियोजनाओं में हुई देरी का इस पर भी असर पड़ा है। साथ ही, यात्रियों की सुविधा के लिए मेट्रो सभी सेवाओं को एकीकृत करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। इसके बाद यात्री टिकट खरीदने के लिए क्यू आर कोड, क्रेडिट, डेबिट कार्ड, मोबाइल का भी इस्तेमाल कर सकेंगे।