इससे पहले जामिया की कुलपति प्रो. नजमा अख़्तर ने आसिफ उमर और ख़ुसरो फाउंडेशन को संदेश भेज कर बधाई दी और डॉ. आसिफ उमर के उज्जवल भविष्य की कामना की। वेदप्रताप वैदिक ने कहा कि यह पुस्तक गंगा-जमुनी तहजीब को समझने में सहायक होगी।
प्रो. अफरोजुल हक़ ने पुस्तक की तथ्यात्मकता पर जोर देते हुए कहा कि यह पुस्तक पूरे हिंदी साहित्य का एक ब्योरा है। उधर, परवेज आलम ने हिंदी भाषा की विशेषता पर बल देते हुए कहा कि भाषा और साहित्य की तमाम विशेषताओं में से एक विशेषता यह भी है कि इसकी कोई सीमा नहीं है।