साइबर सिटी के सेक्टर-10 स्थित सिविल अस्पताल का बुरा हाल है। यहां छुट्टी के दिन इलाज नहीं होता। छुट्टी के दिन न तो यहां कोई डॉक्टर बैठते हैं और न ही कोई स्टाफ नर्स।
22 सितंबर के स्वास्थ्य मंत्री के दौरे के बाद यहां 10 बेड की इमरजेंसी सुविधा शुरू की गई थी। लेकिन एक महीने में ही इमरजेंसी का दम निकल गया है। इमरजेंसी के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक डॉक्टर की तैनाती की गई है, लेकिन बृहस्पतिवार को वाल्मीकि जयंती के दिन कोई भी डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिला।
समय 12: 20 बजे-
सिविल अस्पताल आने वाले मरीजों को इलाज नहीं मिलने पर वापस लौट रहे थे। कादीपुर से आने वाले राहुल ने बताया कि उसे दो दिन पहले बुखार था। यहां आकर भर्ती हुआ था।
बुधवार को टेस्ट के बाद दवा देकर छुट्टी कर दी गई, लेकिन बुखार उतर नहीं रहा है। सुबह से आया हूं, लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है। अब निजी अस्पताल में जाकर इलाज कराउंगा।
दयनीय हालत में अस्पताल और डॉक्टर
समय 12:24 बजे-
इलाज करवाने आए लक्ष्मण ने बताया कि न तो कोई डॉक्टर है और न ही कंपाउंडर। कोई बताने वाला भी नहीं है कि डॉक्टर आएंगे या नहीं।
इमरजेंसी के डॉक्टर मिशन इंद्रधनुष में-
इमरजेंसी के लिए अस्पताल प्रबंधन ने तीन डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई थी, लेकिन राज्य सरकार द्वारा मिशन इंद्रधनुष शुरू करने की तैयारी को लेकर सिविल सर्जन डॉ. रमेश धनखड़ के आदेश पर तीन डॉक्टरों की ड्यूटी लगा दी गई है। जिसकी वजह से इमरजेंसी सेवा के लिए अब कोई डॉक्टर ही नहीं बचा है।
यह है मौजूदा स्थिति-
सेक्टर-10 स्थित 100 बेड के अस्पताल के लिए 42 स्वीकृत पद में से यहां महज 17 डॉक्टर हैं। अस्पताल में एक सीनियर मेडिकल ऑफिसर, 32 मेडिकल ऑफिसर, दो दंत चिकित्सक, 28 स्टाफ नर्स और आठ लैब टेक्निशियन के पद खाली पड़े हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो इमरजेंसी सेवा शुरू करने के लिए चार डॉक्टर, चार नर्स और पांच क्लास-4 कर्मचारी की जरूरत होगी। इसके अलावा ऑक्सीजन, लैब और अन्य मशीनों की जरूरत होगी।