चूंकि बच्चे का वजन 2.2 किलो ही था, इसलिए ऑपरेशन के दौरान करीब 40 फीसदी जोखिम के साथ डॉक्टरों ने सर्जरी शुरू की। करीब पांच घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद बच्चे को बचाने में डॉक्टरों को सफलता मिली। डॉक्टरों के अनुसार, करीब एक सप्ताह की निगरानी के बाद बच्चे को छुट्टी दे दी है।
डॉ. जोथी का कहना है कि इस बीमारी का कोई कारण नहीं होता। हालांकि, अगर मां की उम्र ज्यादा हो या परिवार में किसी नजदीकी रिश्तेदार के साथ शादी होने पर या गर्भावस्था के दौरान पोषण की कमी के कारण हो सकती है। इसके अलावा अगर गर्भधारण के पहले तीन महीनों में मां को संक्रमण हो जाए, उसे एंटीबायोटिक देने पड़ें या मां द्वारा शराब का सेवन, धूम्रपान करना भी इसके कारण हो सकते हैं। इनसे लोगों को बचना चाहिए।