डॉक्टर के अनुसार, 19 वर्षीय युवती पेट में सूजन की शिकायत के साथ सर्जरी ओपीडी में पहुंची थी। कई अस्पतालों में इलाज के बाद भी कोई समाधान न मिलने पर परिवार ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। जांच में पता चला कि 30x20x20 सेमी आकार का ट्यूमर बाएं डायाफ्राम के पास से शुरू होकर पूरे ऊपरी पेट में फैल गया था। यह ट्यूमर प्रमुख रक्त वाहिकाओं से सटा हुआ था और गुर्दे, प्लीहा, पेट, अग्न्याशय और आंतों जैसे महत्वपूर्ण अंगों को विस्थापित कर रहा था। इसकी संरचना से परिपक्व टेराटोमा होने का संदेह था।
सर्जरी के दौरान ट्यूमर की जटिलता और इसके महत्वपूर्ण अंगों से जुड़ाव ने ऑपरेशन को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था। डॉ. शिवानी बी परुथी, डॉ. अरुण कुमार सिंह, डॉ. तारिक हमीद और डॉ. सुषमा के नेतृत्व वाली सर्जिकल यूनिट ने इस ट्यूमर को हटाया है।
इस दौरान बाएं एड्रेनल और प्लीहा की वाहिकाओं को संरक्षित किया गया, जबकि विस्थापित अंगों को उनके सामान्य स्थान पर पुनर्स्थापित किया गया। इसके अलावा डायाफ्राम और बाएं प्लुरा की मरम्मत के साथ-साथ छाती में नाली भी डाली गई। इस सर्जरी में डॉ. निधि अग्रवाल और डॉ. विष्णु पंवार के नेतृत्व वाली एनेस्थीसिया टीम, सीटीवीएस विशेषज्ञ डॉ. विशेष, रेडियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. रेणु यादव, डॉ. कृष्णा भारद्वाज और डॉ. अनुपमा ने अपनी अहम भूमिका निभाई।
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