आरटीआई के जवाब में अक्सर 'लागू नहीं' लिखकर देने वाले प्रशासन को हाईकोर्ट को ऐसा ही जवाब देना भारी पड़ गया। प्रदूषण फैला रहीं फैक्ट्रियों के मामले में बनाई गई रिपोर्ट में स्पष्ट जवाब नहीं देने पर कोर्ट ने डीएम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को तलब किया है।
सुनवाई 12 अगस्त को इलाहाबाद में है। गाजियाबाद में कपड़े रंगाई की 178 फैक्ट्रियों से निकलते प्रदूषित पानी के संबंध में वकील राजकुमार कौशिक ने जनहित याचिका दाखिल की थी।
याचिका में बिना एफ्युलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के फैक्ट्रियों का पानी नदी और नालों में बहाने की शिकायत की गई थी। इस संबंध में हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2015 को आदेश जारी किए थे।
हाल ही में कोर्ट ने गाजियाबाद डीएम से अप्रैल के आदेशों को लागू करने के संबंध में प्रगति रिपोर्ट मांगी थी। इस रिपोर्ट को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयार किया था।
डीएम की ओर से दाखिल की रिपोर्ट में 'लागू नहीं' लिखा होने पर कोर्ट ने स्पष्ट मतलब जानना चाहा। और पूछा कि क्या फैक्ट्रियों को रंगीन, हानिकारक पानी फेंकने की आजादी है? क्या आदेश इन पर लागू नहीं हैं?
डीएम विमल कुमार शर्मा और पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी पारस नाथ ने बताया कि अभी तक उन्हें कोर्ट आदेश की प्रति नहीं मिली है। साथ ही कोर्ट ने गाजियाबाद एसएसपी को पीआईएल दाखिल करने वाले राजकुमार कौशिक की जान की सुरक्षा के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता ने बताया कि एक विधायक ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। ऐसे में हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान लेकर आदेश जारी किया है।