भाजपा में पार्टी पदाधिकारियों के बीच ‘रार’ से हाईकमान काफी नाराज है। हाईकमान ने साफ कहा है चुनाव समाप्त होने के बाद सभी के कामकाज की सीमा तय कर दी जाएगी, ताकि कोई एक दूसरे के काम में किसी तरह का हस्तक्षेप न करें।
सूत्र बताते हैं कि जैसे ही नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो संगठन और पार्टी की भूमिका बदलकर व्यवस्थित हो गई। विशेषकर पर्दे के पीछे आरएसएस (राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ) की भूमिका रही है।
जैसे ही नोएडा विधानसभा में उपचुनाव होने की तिथि घोषित हुई तो नोएडा के लोगों का सीधा आना जाना दिल्ली तक हो गया। नोएडा में स्थानीय स्तर पर संगठन की अव्यवस्था को लेकर आरएसएस काफी नाराज भी हुआ।
पार्टी के सूत्र बताते हैं कि विमला बाथम को जैसे ही प्रत्याशी बनाया गया को भाजपा में रार हो गई। ढेर सारे पदाधिकारी रूठ गए। यह बात जब प्रदेश अध्यक्ष तक पहुंची तो उन्होंने भी पूरी जानकारी ली। बात गंभीर तब हो गई जब इसकी खबर पार्टी मुखिया को लगी।
चुनावी कार्यालय खुलने में भी काफी खींचतान हुई। हाईकमान ने पाया कि यहां पर संगठन के मजबूत पदाधिकारियों पर जिम्मेदारी ही नहीं है। इसके बाद आरएसएस का दखल हुआ और बुधवार को इसके लिए पदाधिकारियों की बैठक भी हुई।
निर्देश दिए गए कि सभी अलग-अलग भूमिका निभाएं। किसी भी व्यक्ति का दखल सीमा के दायरे में ही होना चाहिए। चुनाव के बाद भारी फेरबदल के भी संकेत दिए गए। संगठन के प्रवक्ता विनोद शर्मा ने बताया कि पार्टी में सब कुछ ठीक है। अपनी-अपनी जिम्मेदारी सभी लोग निभा रहे हैं।