अदालत की आड़ लेने के साथ ही सीएजी आडिट से बचने को बिजली वितरण कंपनियों ने एक और दांव चला है।
उनका कहना है कि जिन कंपनियों से बिजली खरीद कर उपभोक्ताओं को दे रही हैं, वे सभी सरकारी कंपनी हैं और उनकी सीएजी आडिट होती है।
जिसके चलते डिस्कॉम्स की 85 फीसदी आय-व्यय की जानकारी प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सीएजी की जानकारी में होता है।
डिस्कॉम्स का कहना है कि एक जुलाई 2002 में बिजली का निजीकरण होने के बाद सरकार और बिजली कंपनी की हिस्सेदारी 49:51 फीसदी की थी।
कंपनी एक्ट-1956 के सेक्शन 617 के तहत डिस्कॉम्स का सीएजी ऑडिट नहीं किया जा सकता है। वैसे भी उनके लेखा-जोखा की पड़ताल सरकार की एजेंसियां ही करती हैं।
दिल्ली के मुख्य सचिव, वित्त सचिव, ऊर्जा सचिव और दिल्ली सरकार की ओर से नामित सदस्यों द्वारा जांची जाती है। सभी जगह से मंजूर होने के बाद ही लेखा-जोखा को दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) को भेजा जाता है।
इसके अलावा सभी दस्तावेज, आय-व्यय की रिपोर्ट डीईआरसी और डिस्कॉम्स की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहती है। डीईआरसी इन सभी मुद्दों पर जन-सुनवाई भी करती है।
आयोग की जन-सुनवाई में बिजली उपभोक्ता भी शमिल होते हैं। डिस्कॉम्स का कहना है कि लगभग 100 प्रतिशत बिजली सरकारी बिजली उत्पादन कंपनियों से ही खरीदी जाती है, जिनका सीएजी ऑडिट होता है।