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'पर्दे पर सेक्स देख शर्माते नहीं हैं युवा'

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नब्बे के दशक में एक गलत डायलॉग से फिल्म फ्लॉप हो जाती थी, लेकिन आज शुरू से आखिर तक फिल्म की कहानी ही समझ नहीं आती है। पहले किरदारों से ज्यादा कहानी को तवज्जो दी जाती थी, लेकिन आजकल हीरो, हीरोइन या फिर आइटम सांग को देखकर दर्शक फिल्म देखने जाते हैं।
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पूरे साल में यदि 30 फिल्में प्रदर्शित होती हैं तो महज एक या दो ही जेहन में रहती हैं। ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में ये बातें मशहूर निर्माता, निर्देशक, लेखक, कहानीकार सुभाष घई ने कहीं।

उन्होंने कहा कि आज फिल्म मॉल कल्चर व उसके युवाओं के लिए बन रही हैं, जहां हाथों में हाथ डाले पॉपकॉर्न खाते दर्शक, सेक्स को देखकर शर्म नहीं बस एंजॉय करते हैं। जबकि पहले ऐसे सीन फिल्मों में नहीं डाले जाते थे। यही कारण है कि मॉल कल्चर को भुनाने के लिए स्क्रिप्ट भी विदेशी हो गई है। जबकि हिन्दुस्तान में किरदारों व कहानियों का खजाना छुपा है।
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आएगा दो मशहूर फिल्मों का रीमेक

मशहूर निर्देशक ने कहा कि गांधी जी पर फिल्म विदेशी बना रहे हैं। जबकि हम महज विदेशियों की नकल को भारतीय सिनेमा के परदे पर दिखाने में व्यस्त हैं।

यह बेहद शर्म की बात है। पूना फिल्म इंस्टीट्यूट से पासआउट होने के बाद में राइटर, डायरेक्टर बनने का सफर बेहद लंबा है। मैंने कुल 19 फिल्में बनाईं, जिनमें 14  सुपरहिट रहीं। जबकि दो फ्लॉप और एक औसत रही।

इसी दौरान मैंने युवाओं को भेड़चाल की तरह बढ़ते देखा। तब जाकर मुक्ता आर्ट्स कंपनी का निर्माण किया, ताकि फिल्मों के साथ-साथ छात्रों को फिल्म, मीडिया व फैशन इंडस्ट्री से जुड़ी बारीकियां सिखा सकूं।

खलनायक और कर्मा का भी आएगा रीमेक
राम लखन व हीरो के बाद अब खलनायक व कर्मा का रीमेक भी दर्शक देख सकेंगे। सुभाष घई ने अपनी चारों फिल्मों के कॉपीराइट बेच दिए हैं। राम लखन कर्ण जौहर तो हीरो फिल्म को सलमान खान बनाएंगे।
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