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Noida: देखरेख के अभाव में जर्जर हुए मकान, संपत्तियों के वारिस भी लापता; करोड़ो रुपये है कीमत

Sun, 11 Feb 2024 02:56 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा

सार

नोएडा में करीब 30 हजार करोड़ की ऐसी बदहाल संपत्तियां हैं, जो देखरेख के अभाव हैं। इसकी जानकारी न तो आरडब्ल्यूए के पास है और न ही प्राधिकरण को। इनकी कीमत एक करोड़ से 15 करोड़ रुपये के बीच है। 
 
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नोएडा प्राधिकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाईटेक शहर में चमचमाती सड़कें, ऊंची-ऊंची इमारतें हैं, जो नोएडा को यूपी के प्रवेश द्वार का दर्जा दिलाती हैं। वहीं, दूसरी ओर शहर में करीब 30 हजार करोड़ की ऐसी बदहाल संपत्तियां भी हैं जो देखरेख के अभाव में चांद में दाग का बोध कराती नजर आती हैं। खास बात यह है कि ऐसी संपत्तियों के वारिस भी नहीं मिल रहे। इसकी जानकारी न तो आरडब्ल्यूए के पास है और न ही प्राधिकरण को। 

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सेक्टरों की साफ-सफाई के दौरान जरूरत पड़ने पर इनके मालिकों को खोजा जाता है, लेकिन किसी के पास इनके नाम, पते और मोबाइल नंबर नहीं मिलते। ऐसी संपत्तियां या तो आधी-अधूरी बनी हुई हैं या पूरा प्लॉट खाली है। इनका आवंटन कई वर्ष पहले हो चुका है। प्राधिकरण ने ऐसे करीब 35 हजार प्लॉटों के आवंटन किए। इनमें से करीब 10 से 15 प्रतिशत प्लॉट या तो खाली हैं या फिर आधे-अधूरे निर्माण वाले हैं। इनकी कीमत एक करोड़ से 15 करोड़ रुपये के बीच है। 

निवेशकों ने कराया अधूरा निर्माण
स्थानीय लोगों के अनुसार, ऐसे प्लाटों पर आधे-अधूरे निर्माण करते हुए दो-चार कमरे बनाकर कंप्लीशन ले लिया गया, फिर इसे छोड़ दिया गया। सूत्रों का कहना है कि ऐसी संपत्तियां उन निवेशकों की हो सकती है जो जमीन की कीमत बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि जिस समय इनका आवंटन हुआ होगा, उस समय इनकी कीमत 50 लाख से लेकर एक करोड़ तक होगी, जो अब पांच करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक जा चुकी है। पॉश सेक्टरों के यह प्लॉट बैंक के ब्याज से कई गुना ज्यादा रिटर्न दे रही हैं। इसके अलावा कई सेक्टरों में ऐसी खाली कोठियों व आधे-अधूरे निर्माण वाले प्लॉट किराये के नाम पर कई लोगों को दिए गए। इसमें अफसर, नेता, निवेशक और भूमाफिया शामिल हैं।
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12 साल में घर बनाना होगा जरूरी, लेकिन हुआ उलटा
प्राधिकरण के अधिकारी के मुताबिक, आवासीय प्लॉट लेने के बाद 12 वर्ष में घर बनाना जरूरी होता है और 50 प्रतिशत निर्माण के बाद कंप्लीशन सर्टिफिकेट लिया जा सकता है। इसी नियम को आधार पर बनाकर कंप्लीशन लिए गए और प्लॉट को ऐसे ही छोड़ दिया गया। इसमें ट्रस्ट के नाम पर प्लॉट का आवंटन हुआ। सदस्यों को प्लॉट दिए गए, जो खाली पड़े हुए हैं। इसी तरह से सेक्टर-51, 52, 122, 44, 41, 105, 108, 31, 36, 42, 43 समेत कई सेक्टरों में जमीनें हैं, जिनकी कीमत 10 करोड़ तक है। सेक्टर-145 में किसान कोटे के आवंटन हुए 10-12 साल हो गए हैं, लेकिन विकास नहीं हुआ। ऐसे में प्लॉट खाली पड़े हुए हैं।

असली मालिक को नहीं मिलती बिकने की जानकारी
कई बार प्राधिकरण में ऐसी भी चर्चा सुनने को मिलती है कि अमुक प्लॉट को किसी दूसरे ने बेच दिया, जबकि असली मालिक को इसकी जानकारी इसलिए नहीं मिल पाई क्योंकि उसका संपर्क सूत्र किसी के पास नहीं होता है। बाद में जानकारी मिलने पर वह प्राधिकरण में आकर लड़ते हैं। कई बार बनी बनाई कोठी में भी भूमाफिया के कब्जा करने की बात सामने आती रहती है, हालांकि जब तक वहां कोई नहीं रहता तब तक हालात काफी खराब होते हैं।

इनका कहना है
आरडब्ल्यूए सेक्टर-52 के अध्यक्ष अशोक शर्मा का कहना है कि सेक्टर में कई ऐसे प्लॉट हैं जहां झाड़ियां उगी हुई हैं। शाम को वहां जाने में भी डर लगता है। इनको देखने कोई नहीं आता है। वहीं, आरडब्ल्यूए सेक्टर-122 के अध्यक्ष डॉ. उमेश शर्मा का कहना है कि यहां करीब 100 प्लॉट हैं, जो प्राधिकरण से 10 से 15 वर्ष पहले लिए गए। इनका कंप्लीशन कराकर गेट पर ताला लगा दिया गया। प्राधिकरण भी इनकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। 

आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दीपक दिव्य कृष्णात्रेय का कहना है कि अधिकांश कंप्लीशन वाले घर हैं। यहां गंदगी पड़ी हुई है। निवासियों की यह भी शिकायत हैं कंप्लीशन वाले घरों में आपराधिक किस्म के लोग रह रहे हैं, जिससे वारदात होने का डर बना रहता है। आरडब्ल्यूए सेक्टर-36 के अध्यक्ष अनीता सिंह का कहना है कि खाली प्लॉट जंगल बन रहे हैं। यहां कई प्लॉट कंप्लीशन लेकर छोड़ दिए गए हैं। इससे आस-पास के लोगों को परेशानी होती है। 

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