विमलेश ने जानकारी दी थी कि बच्चे को उसका देवर महेंद्र, बच्चू सिंह और हेमलता उसके पास लेकर आए थे। आरोपियों ने विमलेश को फिरौती मिलने के बाद 50 हजार रुपये अतिरिक्त देने को कहा था। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की। अदालत गवाहों के बयान और दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद पांचों आरोपियों को दोषी मानते हुए अपहरण और अपहरण की साजिश में आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, बंधक बनाकर रखने के दोष में सात साल और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सुंदर ने हेमलता को किरायेदार बनाकर भेजा था
अधिवक्ता श्यामसुंदर ने बताया कि आरोपी सुंदर सिंह गांव स्थित उनके अस्पताल धर्मराज (अस्पताल अब बंद हो चुका है) में दवा लेने आया था। आरोपी सुंदर सिंह ही अपहरण केस का मास्टर माइंड था। उसने साजिश रचने के बाद बच्चू सिंह व हेमलता उर्फ बबिता को उनके घर में किराये पर रहने के लिए भेजा था। आरोपी एक दूसरे को पति-पत्नी बता रहे थे। इसके बाद आरोपियों ने वारदात को अंजाम दे दिया।