ग्रेटर फरीदाबाद (ग्रेफ) में विकास का मुद्दा इस लोकसभा चुनाव में अहम होगा।
यहां रहने वाले लोग विकास के लिए तरस रहे हैं। न सड़क हैं, न सीवर और न बिजली-पानी। ग्रेफ की दोनों आरडब्ल्यूए फेडरेशनों ने नेताजी के लिए सवाल तैयार कर लिए हैं।
निवेशकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल लाने और मूलभूत सुविधाएं दिलाने की बात करेगा, वही वोट का हकदार होगा।
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हुडा ने नहरपार ग्रेफ में 15 नए सेक्टरों का विस्तार किया है। इसमें निर्माण की शुरुआत 2006 में हो गई थी। यहां करीब 50 हजार फ्लैट तैयार हो रहे हैं। इनमें करीब तीन लाख लोगों के रहने आने का अनुमान है। इस क्षेत्र में रह रहे करीब 2500 परिवारों के 10 हजार वोटर किसी का भी गणित बिगाड़ सकते हैं।
निवेशकों के मुताबिक, बिल्डरों के यहां सभी प्रोजेक्ट 2011 तक पूरे करने थे, लेकिन अधिकांश 2012 में शुरू हुए। इस समय जो परिवार यहां रह रहे हैं, उन्हें कोई सुविधा नहीं मिल रही है।
इसे लेकर निवेशक कई बार सड़क पर उतरकर आंदोलन कर चुके हैं। हुडा अधिकारियों की ओर से अब 2015 तक काम पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
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ग्रेटर फरीदाबाद वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव, अजय यादव का कहना है कि अभी तो हुडा मूलभूत सुविधाओं के लिए जमीन तक अधिगृहीत नहीं कर पाया है। ऐसे में सुविधाओं को कहां से पूरा किया जाएगा। निवेशक परेशान हैं। वे किराया भी दे रहे है और अपने फ्लैट की किस्त भी। जो लोग रह रहे हैं वे जेनरेटर की महंगी बिजली ले रहे हैं। पानी खरीदना पड़ रहा है।
फेडरेशन ऑफ अपार्टमेंट ऑनर एसोसिएशन, ग्रेफ के सचिव, उमेश प्रभाकर ने बताया कि सत्ता पक्ष ही नहीं, विपक्ष को भी निवेशकों के सवालों के जवाब देने होंगे। उनकी भी उतनी ही जिम्मेदारी है, जितनी कि सत्ता में रहने वाले जनप्रतिनिधि की। वोट तो आखिरकार दोनों को चाहिए।
ये हैं हालात
प्रोजेक्ट.............काम की स्थिति
मास्टर रोड.............75 प्रतिशत पूरा
सीवरेज..................10 प्रतिशत पूरा
सीवरेज ट्रीटमेंट.........जमीन नहीं मिली
वाटर सप्लाई.............शुरू नहीं
बरसाती पानी निकासी......40 प्रतिशत पूरा
बिजली सब स्टेशन..........जमीन नहीं मिली
बिजली आपूर्ति...............40 फीसदी हिस्से में सिर्फ खंभे खड़े
सुरक्षा..........................कुछ नहीं
ट्रांसपोर्ट सिस्टम..............कुछ नहीं