लगता है कि हरियाणा राज्य परिवहन निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों को वर्दी नहीं भा रही है। चालक हो, परिचालक हो या अन्य स्टाफ, वह ड्यूटी पर वर्दी पहनना पसंद ही नहीं करते हैं।
आदेशों के बावजूद कर्मचारी व अधिकारी सादे कपड़ों में ड्यूटी करने पहुंचते हैं। अधिकारी भी इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। रोडवेज विभाग के कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान अनिवार्य रूप से वर्दी पहननी होती है।
विभाग अपने कर्मचारियों को वर्दी का कपड़ा व सिलाई के पैसे भी देता है। वर्दी को लेकर 29 अगस्त को परिवहन महानिदेशक के फरमान के बाद डिपो महाप्रबंधक भी कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान वर्दीपहनने के आदेश दे चुके हैं। इन सब के बावजूद कर्मचारी ड्यूटी के दौरान वर्दी नहीं पहन रहे हैं। जुर्माना लगाने वाले अधिकारी भी खुद वर्दी पहने नजर नहीं आते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्त आदेश
बता दें दो साल पहले दिल्ली में हुए दामिनी बलात्कार कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए थे कि कोई भी चालक या परिचालक बिना अपनी वर्दी के ड्यूटी पर नहीं आएगा।
लेकिन बल्लभगढ़ डिपो में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन साफ दिखता है। हालात यह हैं कि ज्यादातर कर्मचारी अपना रौब दिखाने के लिए सफेद कपड़े पहनते हैं। जब उनसे वर्दी के बारे में बात की जाए तो वे नेतागिरी दिखाने से भी नहीं चूकते। उनका कहना है कि वर्दी पहनने में वो बात कहां, जो मनपसंद कपड़ों में है।
यात्री और परिचालक की पहचान करना मुश्किल
डिपो के परिचालकों के पास अगर टिकट व थैला न हो तो बस में परिचालक व यात्री को पहचानना मुश्किल हो जाता है क्योंकि दोनों ही सामान्य कपड़ों में होते हैं।
इसी अंतर को दर्शाने के लिए दामिनी प्रकरण के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक ट्रांसपोर्ट के कर्मचारियों के लिए वर्दी पहनना जरूरी
किया था। लेकिन रोडवेज के चालक परिचालक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
कौन करेगा जुर्माना
रोडवेज के चालक, परिचालक, लिपिक, इंस्पेक्टर, टिकट चेकिंग, स्टाफ, वर्कशॉप के कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान वर्दी पहननी होती है। जिन कर्मचारियों को जुर्माना लगाने का अधिकारी है वे ही स्वयं वर्दी नहीं पहनते। ऐसे में सवाल उठता है कि सादी वर्दी में पहुंच रहे कर्मचारियों पर जुर्माना कौन करेगा?