डेंगू के रोगियों को भर्ती न करने की दिल्ली की घटनाओं से देशभर में हड़कंप है। शासन के निर्देश पर यूपी में सभी सीएमओ ने निजी अस्पतालों को कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं।
कोई भी अस्पताल डेंगू के रोगी की गंभीर हालत होने पर उसे भर्ती करने से इंकार नहीं कर सकता है। ऐसा मामला सामने आने पर संबंधित अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।
इधर, स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो दिन में जो सैंपल लिए गए उसमें 6 केस पॉजिटिव मिले हैं। इस तरह से सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गाजियाबाद में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या 66 हो गई है।
सीएमओ डा. अजेय अग्रवाल ने बुधवार को लोगों के लिए गाइडलाइन और अस्पतालों के लिए आदेश जारी कर दिए। लोगों को समझाने का प्रयास किया गया है कि वायरल और डेंगू में भेद समझें।
डेंगू में गंभीर हालत होने पर ही मरीजों को भर्ती कराया जाए। यदि किसी अस्पताल में डेंगू के मरीज को भर्ती न करने का मामला सामने आता है तो उसका पंजीकरण रद्द कर कार्रवाई की जाएगी।
आज जारी होंगे हेल्पलाइन नंबर
शासन के निर्देश पर प्रत्येक जनपद में स्वास्थ्य विभाग कंट्रोल रूम बनाकर हेल्पलाइन नंबर जारी करेगा। डीएमओ डा. जीके मिश्रा ने बताया कि बृहस्पतिवार को दिन और रात के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने लिए 50 सैंपल
स्वास्थ्य विभाग ने बीते मंगलवार और बुधवार को 50 सैंपल लिए थे। जिसमें से गाजियाबाद के 6 केस पॉजिटिव मिले हैं। जबकि तीन केस दिल्ली और दो पाजिटिव केस नोएडा के हैं।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी समेत कई डेंगू की चपेट में
जनपद में डेंगू का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी समेत कइयों को डेंगू के चलते अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
सरकारी अस्पतालों में जितने मरीज आ रहे हैं, उसमें 80 प्रतिशत ऐसे मरीज हैं, जो वायरल या बुखार से पीड़ित हैं। हालांकि डेंगू की पुष्टि टेस्ट के बाद ही होती है। इसलिए सरकारी स्तर पर डेंगू की पुष्टि कम ही होती है।
वैसे स्वास्थ्य विभाग ने एमएमजी और कंबाइंड अस्पताल में अलग से डेंगू वार्ड बनाया गया है। इनमें करीब 20 मरीज भर्ती हैं।
बुधवार को अमरोहा के वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी रास बिहारी सिंह को भी डेंगू हो गया। डेंगू होने की पुष्टि उनके परिजनों ने की है। परिजनों के मुताबिक बीते रविवार को अचानक तबीयत बिगड़ी और बुखार आ गया।
सोमवार को गाजियाबाद लाकर इंदिरापुरम स्थित शांति गोपाल अस्पताल में टेस्ट कराया। टेस्ट पॉजिटिव आया। इसके बाद तुरंत ही उन्हें एडमिट कर लिया।
वहीं कंबाइंड अस्पताल में नंदग्राम की एफ ब्लॉक निवासी सोनी को भी प्लेटलेट्स कम होने के कारण डेंगू वार्ड में भर्ती किया गया है।
स्कूलों में पूरे कपड़े पहनकर आएं बच्चे
डेंगू को देखते हुए स्कूलों में भी विशेष एहतियात बरता जा रहा है। अधिकांश स्कूलों में स्टूडेंट्स को पूरे बांह की शर्ट और पैंट पहनकर आने की सलाह दी जा रही है। स्कूल प्रबंधन भी इस ओर सावधानी बरत रहे हैं।
कई स्कूलों में पहले से ही सर्कुलर जारी कर दिया गया है, जिसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूल में सभी स्टूडेंट्स फुल शर्ट और पैंट पहनकर आएं। यदि किसी को बुखार आ रहा है तो वह स्कूल न आए, क्योंकि उससे अन्य स्टूडेंट्स भी प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही डेंगू से बचाव के तरीके भी बताए जा रहे हैं।
होम्योपैथिक दवाओं का प्रयोग कर बच सकते हें डेंगू से
डेंगू के कारण चारों ओर हड़कंप मचा है। लोगों में डेंगू का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों में मरीजों को बेड नहीं मिल रहे हैं।
उपचार के नाम पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं और कई लोगों की मौत भी इसके कारण हो रही है। ऐसे में होम्योपैथिक चिकित्सकों ने बचाव के लिए दवा का प्रयोग करने की सलाह दी है। चिकित्सकों का दावा है कि इनके प्रयोग से डेंगू होने का खतरा 90 फीसदी कम हो जाता है।
वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डा. कंचन मित्तल ने बताया कि होम्योपैथिक में डेंगू का संक्रमण रोकने वाली दवाओं का असर बेहतर है। जब डेंगू का संक्रमण फैल रहा हो तो इससे बचाव के लिए ‘यूपाटोरियम पफलेटम’ दवा पांच दिन लेनी होती है। इसकी 10-10 बूंद दवा या 10-10 गोली ली जा सकती है।
आसपास फैल रहे संक्रमण के अनुसार इसका प्रयोग दिन में एक बार से लेकर तीन बार तक किया जा सकता है। इसी तरह यदि किसी की प्लेटलेट्स में गिरावट आ रही हो तो ‘कोरिका पोपाया एक्सट्रेक्ट’ का प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही ‘आर्सेनिक एल्बुयम’ का प्रयोग करना चाहिए।
इनके प्रयोग से प्लेटलेटस में कुछ ही घंटों में हैरतअंगेज बढ़ोतरी होती है। डा. कंचन मित्तल ने बताया कि ये हर्ब मेडिसन होती हैं, जिससे इनके कारण कोई नुकसान नहीं होती और असर बड़ी तेजी से होता है।
तालाब और फुलवारी में भी पनप रहे हैं डेंगू के मच्छर
डेंगू के लिए जिम्मेदार मच्छर एडीज का मिजाज अब एनसीआर में भी बदलने लगा है। दक्षिण भारत में फुलवारी और फसलों के पौधों पर ब्रीडिंग करने वाला मच्छर अब एनसीआर में भी प्रभावी हो गया है।
ऐसे ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। डेंगू रोगियों की संख्या बढ़ने का एक कारण यह भी है कि मच्छरों ने ब्रीडिंग के लिए कई नए स्थान तलाश लिए हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच में नया मामला सामने आया है। एडीज एल्फोपिक्स नाम की प्रजाति वाला मच्छर आजकल एनसीआर में प्रभावी हो रहा है।
इससे विशेषज्ञ चिंतित हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभी तक यह भरे हुए साफ पानी में पनपता था। अब इसको पानी भरे होने की जरूरत नहीं है।
यह घरों के गमलों के खड़े पौधों, ग्रीनरी-पार्क के पौधों के तने और पत्तों की जड़ों में आने वाली नमी में ही ब्रीडिंग कर रहा है। साफ फर्श पर पानी फैलने पर भी इसकी ब्रीडिंग हो जाती है। यदि पानी में मिट्टी मिली है तो एडीज मादा ब्रीडिंग नहीं करती है।