बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर दुष्प्रभाव के खतरे की आशंका
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी ने मच्छरों के प्रजनन को रोकने और मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए समय से पहले फॉगिंग अभियान शुरू कर दिया है। एमसीडी के आंकड़े बताते हैं कि इस साल डेंगू और मच्छरजनित रोगों के मामले पिछले साल से कम हैं। माना जाता है कि फॉगिंग का बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर दुष्प्रभाव होने का खतरा रहता है। इस कारण मच्छरों का प्रजनन और मच्छरजनित बीमारियों के मामले बढ़ने पर ही फॉगिंग की जाती है।
एमसीडी की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इस वर्ष अब तक 277 डेंगू मामले दर्ज हुए हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 284 था। एमसीडी ने दावा किया है कि इस वर्ष छह लाख से अधिक घरों में फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव किया गया है, जोकि पिछले वर्ष के मुकाबले दोगुना है। साथ ही 282 स्थानों पर जैविक नियंत्रण उपाय भी किए गए हैं। महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह ने इन प्रयासों की समीक्षा करते हुए कहा कि एमसीडी की सक्रिय कार्रवाई की वजह से डेंगू के मामलों में गिरावट आई है।
हालांकि, एमसीडी की यह सक्रियता सवालों के घेरे में है। आमतौर पर एमसीडी मच्छरों का प्रकोप और मच्छरजनित बीमारियां चरम पर होने पर सितंबर और अक्तूबर में फॉगिंग करती है। क्योंकि फॉगिंग का बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर दुष्प्रभाव होने का खतरा रहता है। एमसीडी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस बारे में बात करने से कतराते रहे। उधर, एमसीडी की विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मच्छरों के प्रजनन की जांच और नियंत्रण कार्यों में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है।