डेंगू-मलेरिया के नाम पर दूसरे को नसीहत देने वाले खुद कितने सजग हैं? इसकी बानगी स्वास्थ्य विभाग में देखने को मिल रही है। दीया तले अंधेरा की कहावत यहां सत्य हो रही है। सेक्टर-10 अस्पताल के आंगन में ही मलेरिया के मच्छर पनप रहे हैं, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
जबकि मलेरिया विभाग का दफ्तर इसी अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित है। अब घरों में लार्वा मिलने पर कार्रवाई करने वाले मलेरिया विभाग के खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा? यह बड़ा सवाल है।
बारिश के बाद अस्पताल के पीछे पानी जमा है। सिविल अस्पताल के बाहर भी स्कूल से लगते गड्ढों में जमा पानी में मच्छर पनप रहे हैं, लेकिन इसके लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं है। अस्पताल से महज 100 मीटर की दूरी पर मच्छरों को पनपने से रोकने के लिए अभी तक एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं किया गया है। यहां पनपने वाले मच्छर अस्पताल और आसपास की आबादी के लोगों को मलेरिया का डंक दे रहे हैं।
हुडा (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) द्वारा तैयार सेक्टर-10 अस्पताल में सीवर व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। सीवेज ब्लॉक होने की वजह से गंदा पानी फ्लो मारकर अस्पताल के पीछे के हिस्से में आता है, जबकि इसे दुरुस्त करने के लिए अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक द्वारा हुडा को कई बार पत्र लिखा जा चुका है, लेकिन अब तक दुरुस्त नहीं हुआ है। वहीं, मलेरिया विभाग अपने पास कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है।
डॉ. रमेश धनखड़, सिविल सर्जन: जगह-जगह एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है। अस्पताल में भी छिड़काव कराया गया था। फिर से करा दिया जाएगा। कर्मचारी की कमी की वजह से हर जगह पहुंच पाना मुमकिन नहीं है।