नेपाल के 71 वर्षीय प्रेम बहादुर की जेब में पैसे तो हैं, लेकिन वह इनके लिए महज एक कागज का टुकड़ा हैं। क्योंकि उन पैसों से वह राशन नहीं ला पा रहे हैं। बीते एक सप्ताह में बचा सामान भी खत्म होने लगा है। जिससे भूखे रहने की नौबत आ गई है। अब प्रेम बहादुर को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर करें तो क्या करें?
नेपाल की राजधानी काठमांडू से 300 किलोमीटर दूर अर्घखांची के रहने वाले प्रेम बहादुर गुरुग्राम के सरस्वती कुंज में अपने बेटे, बहू और पोते के साथ रहते हैं। छह बाय आठ के कमरे में रहने वाले प्रेम बहादुर की तंगहाल स्थिति उनके घर से मालूम होती है। छोटी सी खाट है परिवार के लिए सोने का भी इंतजाम नहीं है। लोगों के आने पर उसी खाट पर जगह देते हैं।
अमर उजाला की टीम ने जब उनसे बात की तो घर की आर्थिक तंगी की दास्तां उनकी आंखों से बयां हो गई। रसोइयां का काम करने वाले प्रेम बहादुर का मंझला बेटा खेम बहादुर कहते हैं, 05 तारीख को 11 हजार रुपये तनख्वाह मिली थी।