अत्याधुनिक तकनीकों की बदौलत बीएसईएस अब बिजली की मांग का लगभग सटीक अनुमान लगा सकती है। इसके लिए, लोड फोरकास्टिंग सिस्टम के अलावा मॉडलिंग तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में ये तकनीक काफी मददगार साबित होंगी। लोड फोरकास्टिंग सिस्टम की मदद से बीएसईएस अब तीन स्तरों पर बिजली की मांग का करीब सटीक अनुमान लगा पाने में सक्षम है। कल बिजली की क्या मांग रहने वाली है, इसका पता लगाया जा सकता है। यह भी जाना जा सकता है कि कल बिजली की क्या डिमांड होगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ले रहे मदद
बिजली की मांग का सटीक अनुमान लगाने के लिए बीएसईएस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की भी मदद ले रही है। इन तकनीकों के इस्तेमाल से बिजली की मांग का लगभग सटीक अनुमान लगाकर उपभोक्ताओं को बिजली की सुचारु आपूर्ति करने में मदद मिलेगी। दिल्ली में बिजली की डिमांड के उतार-चढ़ाव में मौसम की बड़ी भुमिका होती है, इसलिए बिजली की मांग का अनुमान लगाते वक्त वेदर फोरकास्टिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे यह पता चलता है कि कल का मौसम कैसा रहेगा, बारिश होगी या नहीं, तापमान गिरेगा या बढ़ेगा, हवा की गति कैसी रहेगी।
गर्मियों की तैयारी अभी से शुरू की
बीएसईएस ने सर्दियों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के अलावा, अभी से ही गर्मियों की तैयारियां भी शुरू कर दी है। इसके लिए पावर बैंकिंग मॉड्यूल का उपयोग किया जा रहा है। बीएसईएस सर्दियों में कुछ ठंडे प्रदेशों को बिजली देगी और बदले में वे ठंडे प्रदेश गर्मियों में बीएसईएस को बिजली वापस करेंगे, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को गर्मियों में मिलेगा।