साहब! मैं करनाल से आया हूं और मुझे गुरुग्राम मास्क की पेटियां देने जाना है। मैं गुरुग्राम के लोगों के भले के लिए जा रहा हूं। मुझे अस्पताल में ये मास्क भिजवाने हैं। करनाल के जितेन्द्र ने दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस से गुरुग्राम जाने के लिए खूब गुहार लगाई, लेकिन उसे जाने नहीं दिया गया। थक-हारकर जितेन्द्र ने गुरुग्राम स्थित अस्पताल से किसी को बुलाया और बॉर्डर पर मास्क की पेटियां दे दीं।
ऐसा ही कुछ सुरेन्द्र के साथ हुआ। सुरेन्द्र स्विग्गी में डिलीवरी ब्वॉय है। वह दिल्ली से गुरुग्राम फलों की डिलीवरी देने जा रहा था। उसे भी नहीं जाने दिया तो उसने डिलीवरी लेने से वाले व्यक्ति को गुरुग्राम से बुलाया और बॉर्डर पर ही डिलीवरी दे दी। संगम पार्क, आदर्श नगर, दिल्ली में रहने वाले राहुल को कुछ जरूरी कागजात देने के लिए गुरुग्राम जाना था, उसे भी नहीं जाने दिया गया। राहुल ने भी गुरुग्राम से किसी को बुलाकर बॉर्डर पर ही कागजात दे दिए।
पूजा कुमार गुरुग्राम स्थित न्यू लाइफ फेसिलिटी अस्पताल में नर्स है। पूजा को उसके पिता अस्पताल छोड़ने जा रहे थे। पूजा ने अपना परिचय पत्र दिखाया। नहीं जाने दिया तो वापस दिल्ली आ गई। गुरुग्राम निवासी अजय उपाध्याय ने बताया कि वह दिल्ली दवाइयां देने आया था। उसे वापस गुरुग्राम नहीं जाने दिया गया। सीआईएसएफ के सिपाही रामसिंह अपने साथी के साथ बाइक से गुरुग्राम जा रहे थे। उन्होंने अपना परिचय पत्र भी दिखाया, लेकिन उन्हें भी नहीं जाने दिया।
सोमवार को दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर पर कुछ इस तरह का नजारा था। बड़ी संख्या में लोग वाहनों के साथ खड़े थे और पुलिस से आधा से एक घंटे तक गुरुग्राम में एंट्री करने के लिए मिन्नत कर रहे थे। हालांकि, यह भी देखने को मिला कि जिनके पास पास नहीं था और पुलिसकर्मियों को लगा कि उसकी परेशानी जायज है तो ऐसे कुछेक लोगों को जाने भी दिया गया। बॉर्डर से जरूरी सेवाओं व केन्द्र सरकार, हरियाणा सरकार व हरियाणा के डीएम द्वारा जारी पास से ही लोगों को जाने दे रहे थे। वाहनों के लिए दो लाइनें बनी हुई थी। जरूरी सामान वाले वाहन दूसरी लाइन से गुजर रहे थे, जबकि प्राइवेट गाड़ियों को चेक करने के बाद ही गुरुग्राम में जाने दिया जा रहा था। इस कारण दिल्ली से गुरुग्राम जाने वाले कैरिज्वे पर प्राइवेट वाहनों की काफी लंबी लाइन लग रही थी।
लॉकडाउन में छूट सुनकर सड़कों पर आए लोग
काफी लोगों को लगा कि दिल्ली में लॉकडाउन में कुछ छूट दी गई है तो गुरुग्राम जाने दिया जाएगा। इस कारण काफी संख्या में लोग पहुंच गए थे। इन लोगों को वापस दिल्ली लौटना पड़ा। काफी लोग ऐसे मिले जिन्हें पता ही नहीं था कि दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर सील है।
वापस लौटने वाले वाहनों के लिए नहीं थी व्यवस्था
दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर से जिनको दिल्ली वापस भेजा रहा था उन्हें दिल्ली आने की कोई व्यवस्था नहीं थी। लोग करीब डेढ़ से दो किमी विपरीत दिशा में आ रहे थे। वहीं, दिल्ली से गुरुग्राम जाने वाले वाहन तेजी गति से जा रहे थे। ऐसे में सड़क दुर्घटना की पूरी संभावना बनी हुई थी।
फरीदाबाद और आयानगर बॉर्डर पर भी यही था हाल
दिल्ली व हरियाणा के फरीदाबाद और आयानगर बॉर्डर पर भी यही हाल थे। जरूरी सामान वालों को जाने दे रहे थे। फरीदाबाद बॉर्डर पर कुछ लोग दिल्ली पुलिस से गुहार लगाते रहे कि वह फरीदाबाद जाने के लिए अनुमति दिलवा दें, मगर दिल्ली पुलिसकर्मी भी प्रवेश नहीं करा पाए। दिल्ली पुलिस को भी फरीदाबाद नहीं जाने दिया जा रहा था। फरीदाबाद बॉर्डर पर तो दिल्ली पुलिस ने लोगों को चेक करना शुरू कर दिया और लोगों को वापस लौटाना शुरू कर दिया था। लोगों को लगा कि लॉकडाउन में छूट मिली है तो वह फरीदाबाद जा सकते हैं। पूरी जानकारी न होने के कारण दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर पर काफी लोग पहुंच रहे थे। इन बॉर्डरों पर सुबह के समय एक से डेढ़ किमी लंबी लाइन लग गई थी।