जेएनयू में संस्कृत अभिलेखों पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्राचीन धरोहर के संरक्षण और ऐतिहासिक पुनर्निर्माण पर मंथन को लेकर जेएनयू में ‘संस्कृत अभिलेख : संरक्षण, व्याख्या और ऐतिहासिक पुनर्निर्माण’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत शनिवार को हुई। श्री चंद्रशेखरेन्द्र सरस्वती विश्व महाविद्यालय (एससीएसवीएमवी), उत्तंकिता विद्या अरण्य ट्रस्ट और जेएनयू के संस्कृत एवं प्राच्यविद्या अध्ययन संस्थान (एसएसआईएस) के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे सम्मेलन में देशभर के अभिलेखविद्, इतिहासकार और संस्कृत विद्वान अपने शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जेएनयू की कुलगुरु प्रोफेसर शांतिश्री डी. पंडित ने सम्मेलन की मेजबानी को विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय भारतीय प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक शोध और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जोड़ने वाले अध्ययनों को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा। सम्मेलन में श्री कांची कामकोटि पीठ के जगतगुरु शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती स्वामीगल ने समाज और आध्यात्मिक परिवर्तन पर विचार रखे। उन्होंने कहा, क्रांति के जरिए ही शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।
मुख्य अतिथि रहे राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने संस्कृत अभिलेखों के आधुनिक संदर्भ में अध्ययन और ऐतिहासिक तथ्यों की समकालीन व्याख्या की जरूरत पर जोर दिया। एससीएसवीएमवी के कुलाधिपति प्रोफेसर वी. कुटुम्ब शास्त्री ने संस्कृत अभिलेखों के दार्शनिक और ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। इस मौके पर एससीएसवीएमवी के कुलपति जी. श्रीनीवासु, विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी. रामासुब्रमणियन, जेएनयू के एसएसआईएस के डीन रजनीश मिश्रा आदि मौजूद रहे।