एलजी संधू की अध्यक्षता में डीडीए सलाहकार परिषद की बैठक में लिया गया निर्णय
टीओडी, लैंड पूलिंग, रिवरफ्रंट और पुरानी दिल्ली के पुनर्विकास समेत आठ क्षेत्रों के लिए विकास योजना तैयार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के सुनियोजित और दीर्घकालिक शहरी विकास के लिए डीडीए की सलाहकार परिषद ने राजधानी के करीब 1400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के विकास का रोडमैप तैयार किया है। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में हुई बैठक में आवास, अनधिकृत कॉलोनियों, ट्रैफिक जाम, जल संकट, यमुना तट विकास और पुनर्विकास जैसी प्रमुख चुनौतियों पर चर्चा करते हुए इनके समाधान के लिए व्यापक रणनीति पर सहमति बनी।
बैठक में बताया गया कि विकास योजना के तहत 207 वर्ग किमी में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी), 200 वर्ग किमी में लैंड पूलिंग, 700 वर्ग किमी विकसित आवासीय क्षेत्रों, 100 वर्ग किमी यमुना रिवरफ्रंट (ओ-जोन), 150 वर्ग किमी कम घनत्व वाले क्षेत्रों, 24 वर्ग किमी पुरानी दिल्ली के पुनर्विकास, 31 वर्ग किमी बंगला जोन और 20 वर्ग किमी हाई डेंसिटी कॉरिडोर के लिए अलग-अलग विकास मॉडल तैयार किए गए हैं।
चार स्तंभों पर खड़ी होगी विकसित दिल्ली की मीनार
उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली का विकास समावेशी, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। इसके लिए चार प्रमुख स्तंभ तय किए गए हैं, पर्यावरणीय स्थिरता, बेहतर जीवन गुणवत्ता, आर्थिक एवं सांस्कृतिक मजबूती और समावेशी शहरी विकास मूल स्तंभ हैं। इसके तहत हरित क्षेत्र बढ़ाने, यमुना रिवरफ्रंट विकसित करने, जल सुरक्षा, आपदारोधी बुनियादी ढांचा, सुरक्षित सड़कें, व्यापारिक केंद्रों के पुनर्विकास और मेट्रो आधारित निर्बाध सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
झुग्गी, अनधिकृत कॉलोनियां और जल संकट भी एजेंडे में
बैठक में किफायती आवास की कमी, झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास, अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, शहरी बाढ़, हीट आइलैंड प्रभाव, विरासत भवनों के संरक्षण और जल सुरक्षा को राजधानी की प्रमुख चुनौतियों के रूप में चिह्नित किया गया। उपराज्यपाल ने कहा कि परिषद की ओर से सुझाए गए उपाय दिल्ली को अधिक रहने योग्य, पर्यावरण-अनुकूल और आर्थिक रूप से सशक्त राजधानी बनाने की दिशा में मार्गदर्शक साबित होंगे।