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मकसूद की मौत पर कोर्ट ने की सख्त टिप्पणी

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दिल्ली चिड़ियाघर में बाघ द्वारा युवक मकसूद को मारने के मामले में हाईकोर्ट के नोटिस के बावजूद नेशनल जूलॉजिकल पार्क निदेशक, सेंट्रल जू अथारिटी और पुलिस ने जवाब दाखिल नहीं किया। यही नहीं अदालत में उनके वकील पेश तक नहीं हुए। अदालत ने सभी पक्षों को पक्ष रखने के लिए चार सप्ताह का समय प्रदान किया है।
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मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडला की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को मामले की सुनवाई तय थी लेकिन इन तीनों पक्षों की तरफ से कोई पेश नहीं हुआ।

याची के अधिवक्ता आरके सैनी ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में भी जवाब दाखिल न करना सरासर लापरवाही है। खंडपीठ ने तीनों पक्षों को चार सप्ताह का समय प्रदान कर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की सुनवाई अब 17 दिसंबर तय की है।
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जीवन की भीख मांगता रहा मकसूद

खंडपीठ अधिवक्ता अवध कौशिक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याची ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब करने के अलावा इस मामले में चिड़ियाघर अधिकारी की जिम्मेदारी तय कर उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

इसके अलावा उन्होंने सभी पक्षों को सुरक्षा के उचित उपाय करने का निर्देश देने की मांग की है ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना न हो। याची ने मकसूद के परिवार को बतौर मुआवजा 25 लाख रुपये दिलवाने का भी आग्रह किया है।

याची ने कहा कि 23 सितंबर को हुई घटना में जू प्रशासन की आपराधिक लापरवाही रही है। बाघ विजय के समक्ष युवक 12 से 15 मिनट तक जीवन की भीख मांगता रहा लेकिन जू प्रशासन ने उसे बचाने का कोई प्रयास नहीं किया और न ही प्रशासन के पास उसे बचाने के ठोस साधन थे।
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