दिल्ली महिला आयोग ने महिलाओं की सुरक्षा को खतरा मानते हुए ऐप आधारित पांच टैक्सी ऑपरेटर को नोटिस जारी किया है। आयोग ने नोटिस में ऐप आधारित टैक्सी ऑपरेटर से सात बिंदुओं पर सात दिनों में जानकारी मांगी है। यदि ऑपरेटर तय समय में जानकारी नहीं देते हैं तो फिर आयोग नियमानुसार कार्रवाई करेगा।
आयोग ने पूछा है कि वर्ष 2015 में कुल कितने यात्रियों की शिकायत आयी है। आयोग अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के मुताबिक, ऐप आधारित टैक्सी महिलाओं के लिए खतरा बनती जा रही हैं। क्योंकि इन ऑपरेटर का कोई रिकार्ड सरकार के पास नहीं होता है, ताकि उस पर नकेल कसी जा सके। उबर और ओला कैब ड्राइवर ने महिलाओं से छेड़खानी के साथ-साथ रेप भी किया है।
आयोग ने ऑपरेटर से कुछ सुझाव भी मांगे हैं, जिसमें टैक्सियों में जीपीएस, जीपीआरएस लगा होना चाहिए। वहीं लिंक ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के कंट्रोल रूम से जुड़ा होना चाहिए। टैक्सियों में डिस्पले बोर्ड है, जिसमें यात्रा का कौन सा रूट और कितनी दूरी तय कर ली है। टैक्सी ड्राइवर की फोटो, लाइसेंस का नंबर, बैज नंबर व गाड़ी रजिस्ट्रेशन नंबर टैक्सी के अंदर लगा होना चाहिए।
टैक्सी में पैनिक बटन भी होना चाहिए, ताकि खतरे का आभास होते ही यात्री उसका प्रयोग कर सके। पैनिक बटन का लिंक पुलिस के साथ ऑपरेटर कंपनी तक पहुंच जाए। ऑपरेटर टैक्सी को कंपनी से जोड़ने से पहले ड्राइवर की पुलिस वेरिफकेशन करवाएं, ताकि आपराधिक रिकार्ड की जानकारी मिल सके। वेरिकेशन ऑपरेटर कंपनी खुद करवाएं आदि को लागू करना शामिल है।