दिल्ली को जल्द ही दूसरी टेक्निकल यूनिवर्सिटी मिलने वाली है। नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसआईटी) को यूनिवर्सिटी बनाने के प्रस्ताव को दिल्ली कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी(डीटीयू) की तर्ज पर एनएसआईटी भी नॉन एफिलेटिंग यूनिवर्सिटी बनेगी। इसके लिए नेताजी सुभाष सूचना प्रौद्योगिकी विधेयक, 2015 विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा।
दिल्ली सरकार का तर्क है कि राज्य विश्वविद्यालय बनने से सीटें 3500 से बढ़ाकर 12 हजार तक की जा सकेंगी और दिल्ली के छात्र-छात्राओं को फायदा मिलेगा। क्योंकि आरक्षण लागू होगा। अभी दिल्ली के बाहर पढ़ाई के लिए जाना होता है।
एनएसआईटी के यूनिवर्सिटी बनने से नए कोर्स शुरू करने, पाठ्यक्रम को मार्केट के हिसाब से बदलने, स्टाफ नियुक्ति समेत कई तरह के फैसले लेने में आसानी होगी। अभी कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध है, जिसमें टेक्नोलॉजी या इंजीनिरिंग एक छोटा सा विंग है।
कैबिनेट ने दी मंजूरी, विधानसभा सत्र में पेश होगा विधेयक
देश के टॉप-10 टेक्निकल कॉलेज में शामिल एनएसआईटी अभी स्वायत्त रूप से संचालित की जा रही है। इस संस्थान में अंडरग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और रिसर्च की 900 सीटें हैं। दिल्ली कैबिनेट ने नेताजी सुभाष सूचना प्रौद्योगिकी विधेयक 2015 को मंजूरी दी है, जिसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।
मंजूरी मिलने के बाद एनएसआईटी को राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाएगा। एनएसआईटी गैर संबद्ध विश्वविद्यालय बनेगा, जिसमें किसी दूसरे कॉलेज को संबद्धता नहीं दी जाएगी। संबद्धता वाली यूनिवर्सिटी बनाने में यूजीसी, केंद्र सरकार की कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती है।
दिल्ली सरकार की यूनिवर्सिटी
गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, दिल्ली वीमेन यूनिवर्सिटी, दिल्ली लॉ यूनिवर्सिटी, भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी।