दिल्ली हिंसा के दौरान दंगाईयों के पागलपन का शिकार हुए अंकित के परिवार में बड़े भाई अंकुर शर्मा, बहन सोनम, आईबी में ही कार्यरत पिता रविंद्र शर्मा और गृहिणी मां सुधा हैं। अंकित अविवाहित थे। उनके छोटे भाई अंकुर भी अविवाहित हैं और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। बहन सोनम बीएड कर रही हैं।
परिवार मूल रूप से मुजफ्फरनगर के इटावा गांव का रहने वाला है। वर्तमान में अंकित करावल नगर के ई-ब्लॉक की गली नंबर छह में परिवार समेत रह रहे थे। घटना वाले दिन शाम को वह ड्यूटी से घर लौट रहे थे। इलाके में उपद्रव करती भीड़ देखकर वे दंगाइयों को समझाने लगे।
परिवार वालों ने बताया कि इसी बीच दंगाइयों ने पत्थरबाजी करते हुए अंकित व उनके साथ तीन अन्य लोगों को भी भीड़ में खींच लिया। उनके मुताबिक, स्थानीय आप नेता की बिल्डिंग में ले जाकर पीट-पीटकर अंकित की हत्या कर दी गई। परिजनों का कहना है कि अंकित के घर न लौटने के बाद उन्होंने आसपास के लोगों से पूछा तो वारदात की जानकारी मिली।
इसके बाद परिवार ने दयालपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय घायलों और मृतकों की बीच से पहचान के लिए उन्हें जीटीबी अस्पताल भेज दिया था। वहां अंकित के न मिलने पर परिजनों ने सुबह चांद बाग के नाले में छानबीन की तो अंकित का शव
मिला था।