राजधानी दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियां एक बार फिर लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी हैं। बृहस्पतिवार को डेंगू से पीड़ित दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
बताया जाता है कि उनका प्लेट्लेटस 10 हजार रह गया था। परिजनों ने डेंगू से मौत होने की बात कही है हालांकि अस्पताल ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
पूर्वी दिल्ली के श्यामलाल कॉलेज में इतिहास के प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार को बुधवार शाम को सुंदर लाल जैन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी प्लेटलेट्स लगातार गिरती चली गईं। कहा जा रहा है कि प्लेटलेट्स 10 हजार ही रह गई थीं।
एमसीडी के आंकड़ों के मुताबिक एक ही मौत
प्रोफेसर डॉ. संजय कुमार
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डॉक्टर ने परिजनों से प्लेटलेट्स का इंतजाम करने को कहा था, लेकिन इससे पहले ही संजय कुमार ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने डेंगू से उनकी मौत होने की बात कही है।
साथ ही यह भी दावा किया है कि उनके क्षेत्र में और भी कई लोग डेंगू से पीड़ित हैं। लेकिन एमसीडी की ओर से अब तक एक भी बार फॉगिंग नहीं की गई है और न ही उनके इलाके में साफ सफाई के बेहतर इंतजाम हैं।
मालूम हो कि पिछले सप्ताह डेंगू से ही एक बुराड़ी निवासी बच्ची की मौत हुई थी। परिजनों ने खुद इसका खुलासा किया था। लेकिन एमसीडी की ओर से उनके दावों की जांच नहीं की गई। एमसीडी के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में डेंगू से अभी तक एक ही मौत हुई है।
शिक्षकों ने कुलपति से की शिकायत
प्रोफेसर की मौत के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों के संगठन ने विवि के कुलपति से शिकायत में कहा है कि बड़ी तादाद में शिक्षक और स्टाफ इस समय डेंगू ग्रस्त हैं।
संगठन के सदस्य राजेश कुमार झा ने शिकायत में यह भी लिखा है कि दिल्ली के अस्पतालों में हालात बुरे हैं। ऐसे में जरूरी है कि विवि की ओर से बीमार शिक्षकों और स्टाफ का उपचार किसी बेहतर अस्पताल में करवाया जाए। इसका पूरा खर्चा विवि की ओर से ही उठाए।
अगस्त में हुई थी पहली मौत
बता दें कि दिल्ली में इस साल डेंगू से पहली मौत अगस्त में हुई थी। दिल्ली गेट स्थित लोकनायक अस्पताल में बुखार से पीड़ित एक 40 वर्षीय व्यक्ति ने डेंगू के कारण दम तोड़ दिया था। गौर करने वाली बात यह है कि अब तक हुई तीनों मौत में प्लेटलेट्स कम होना मुख्य कारण देखने को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि 20 हजार से कम प्लेटलेट्स होने पर डेंगू का असर जानलेवा हो जाता है। जबकि अस्पतालों में प्लेटलेट्स की कमी इन दिनों बनी हुई है।