ओपन बुक एग्जामिनेशन में बुरी तरह से असफल रहने के बाद आखिरकार दिल्ली यूनिवर्सिटी ने परीक्षाएं कराने का अपना फैसला 15 अगस्त तक के लिए टाल दिया है। परीक्षाओं की नई तारीखों की जानकारी बाद में तय की जाएगी। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने बुधवार को यह जानकारी हाईकोर्ट में परीक्षाओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दी।
यूनिवर्सिटी ने 10 जुलाई से ओपन बुक एग्जामिनेशन के माध्यम से परीक्षाएं लेने की घोषणा की थी, जिसका हर स्तर पर विरोध किया जा रहा था।
छात्रों का सबसे ज्यादा विरोध परीक्षा के माध्यम को लेकर था। मॉक टेस्ट में बार-बार भारी गड़बड़ियां सामने आ रही थीं। इसे देखते हुए छात्रों की चिंता थी कि अगर मुख्य परीक्षा के दौरान भी इसी तरह की परेशानी सामने आती है, तो इससे उनका भविष्य खराब हो जाएगा।
इसे देखते हुए छात्र लगातार परीक्षाओं को टालने या अन्य वैकल्पिक माध्यम अपनाए जाने का सुझाव दे रहे थे। लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय ओपन बुक एग्जामिनेशन के माध्यम से परीक्षाएं लेने पर अड़ा हुआ था।
यहां तक कि मॉक टेस्ट में असफलता के बाद भी डीन ने यह कहा था कि मॉक टेस्ट का आयोजन गलतियों को समझने और तैयारियों की चेकिंग के लिए ही किया जा रहा है और वे मुख्य परीक्षा के दिन तक इन खामियों को दूर कर लेंगे।
लेकिन आरोप है कि मॉक टेस्ट के अंतिम दिन 8 जुलाई तक भी इन खामियों पर काबू नहीं पाया जा सका।
‘अगस्त के बाद परीक्षाएं किस माध्यम से ली जाएंगी, इस पर अभी भी कोई फैसला नहीं लिया गया है। यूजीसी ने परीक्षाएं लेने के माध्यम का फैसला चुनने का अधिकार विश्वविद्यालयों पर ही छोड़ दिया है। वे चाहें तो ऑनलाइन, ऑफलाइन या अन्य तरीके से परीक्षाएं ले सकते हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मॉक टेस्ट में दिल्ली यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं की तैयारियों की कलई खुल गई थी, हिंदी के छात्रों को बी.कॉम का पेपर दिया जा रहा था, तो कहीं फर्स्ट ईयर के छात्रों को थर्ड ईयर का पेपर पकड़ाया जा रहा था।
मॉक टेस्ट के अंतिम दिन तक यह समस्या दूर नहीं की जा सकी। इस समस्या से नहीं उबर पाने के कारण मंगलवार देर रात यूनिवर्सिटी के शीर्ष पदाधिकारियों की एक बैठक में परीक्षाओं को टालने का फैसला लिया गया।
दिल्ली यूनिवर्सिटी की एग्जीक्यूटिव काउंसिल के सदस्य राजेश झा ने इस फैसले पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को यह कदम पहले ही उठाना चाहिए था।
अगर यूनिवर्सिटी इस मामले का फैसला प्रक्रिया के अनुसार लेती, तो इस गलतफहमी से बचा जा सकता था। अब अगस्त माह में परीक्षा के तरीकों पर परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय लिया जायेगा।