कबाड़ बन चुके वाहनों पर शिकंजा कसने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। पुराने वाहनों से प्रदूषण के बढ़ते खतरे को देखते हुए परिवहन विभाग ने पुराने वाहनों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मियाद पूरी कर चुके वाहनों को जब्त करने के लिए अभियान से स्क्रैप का कारोबार तकरीबन दोगुना हो गया है। माना जा रहा है कि वाहनों को स्क्रैप करवाने पर मिलने वाली वित्तीय राहत से और अधिक वाहन मालिक अपने वाहनों को स्क्रैप करवाएंगे।
अब वाहनों की संख्या अपेक्षाकृत कम
स्क्रैप वाहनों के लिए नई नीति बनाने के बाद से दिल्ली समेत दूसरे राज्यों में भी कबाड़ बन चुके वाहनों पर शिकंजा कसने की कोशिशें चल रही हैं। 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं है। दिल्ली में पुराने हो चुके वाहनों का आकलन 40 लाख तक किया जा रहा है। हालांकि स्क्रैप वाहनों के कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि संख्या इतनी अधिक नहीं है। 20-25 फीसदी वाहन पहले ही निजी स्क्रैपर को बेचे जा चुके हैं, इसलिए अब वाहनों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
स्क्रैप वाहनों पर इंसटिव से प्रदूषण में आएगी कमी
मायापुरी स्थित एक अधिकृत स्क्रैप डीलर कंपनी के डायरेक्टर यश अरोड़ा ने कहा कि पुराने वाहनों को करने के लिए अभियान शुरू होने से स्क्रैप में बढ़ोतरी हुई है। हर माह पहले 100 वाहनों को स्क्रैप किया जाता है। पहले यह संख्या 50 के करीब थी। सरकार की ओर से पुराने वाहनों के स्क्रैप पर मिलने वाली वित्तीय राहत(इंसेटिव)से प्रदूषण के लिए जिम्मेवार कबाड़ होने वाले और अधिक वाहनों को स्क्रैप किया जा सकेगा। लंबे समय तक अभियान के जारी रहने से प्रदूषण स्तर को कम करना और आसान होगा।