विभाजन के वक्त दिल्ली पहुंचे शरणार्थियों ने जीविकोपार्जन के लिए 1952 दुकानें शुरू की गई थी। 200 दुकानें पहले अलॉट की गई, फिर बाद में सब्जी मार्केट, बाबू पार्कट सहित छोटी मार्केट में दुकानों की संख्या बढ़कर 450 से अधिक हो गई। कम कीमत में नए फैशन और गुणवत्ता उत्पादों की खरीदारी के लिए रोजाना हजारों ग्राहक पहुंचते हैं।
30 करोड़ रुपये का हर महीने होता है कारोबार
दुकानों में हर रोज करीब एक करोड़ यानि हर महीने औसतन 30 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री होती है। डिजाइनर कपड़े, जूते, चश्मे, बैग सहित जरूरी सामानों की कई दुकानें हैं। दुकानदारों का दावा है कि सरोजनी नगर मार्केट में लेटेस्ट कपड़े या दूसरे सामान कम कीमत में खरीदने के लिए रोजाना हजारों युवा पहुंचते हैं।
सभी बंदिशें हटाने के बाद मार्केट में फिर ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। पहुंचने के लिए बस, मेट्रो, ऑटो, टैक्सी और ई रिक्शा की सुविधा है। मेट्रो से पहुंचने वालों की संख्या सबसे अधिक है। पार्किंग और महिलाओं के लिए टॉयलेट की संख्या में बढ़ोतरी जरूरी है। 1990 के दशक के बाद मार्केट में टाइल्स, रंगाई या कोई और काम नहीं किए गए हैं। मोबाइल नेटवर्क के लिए वाई फाई की सुविधा न होने से रोजाना सैकड़ों ग्राहकों को खरीदारी के बाद भी ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने पर एटीएम का रुख करना पड़ता है। दिल्ली के अधिकतर क्षेत्रों में मिलने वाली वाई फाई की सुविधा एसएन मार्केट में भी होगी तो ग्राहकों और कारोबारियों की परेशानी कम होंगी। -अशोक रंधावा, दुकानदार
अंडरग्राउंड पार्किंग से ग्राहकों को मिलेगी राहत
पार्किंग के लिए अंडरग्राउंड पार्किंग का होना बेहद जरूरी है। इसके न होने से ग्राहकों को रोजाना परेशानी होती है। छोटी पार्किंग में अगर जगह नहीं मिली तो बाहर में घूमने वाले क्रेन कभी भी वाहनों को उठा ले जाते हैं। पार्किंग की सुविधा ऐसी हो ताकि कम समय में अधिक से अधिक लोगों को इस्तेमाल का मौका मिल सके। हाल ही में एनडीएमसी ने एक पिंक टॉयलेट की शुरुआत की है, लेकिन महिलाओं की सुविधा के लिए संख्या में बढ़ोतरी जरूरी है। बच्चों के साथ पहुंचने वाली महिलाओं के फीडिंग सेंटर का होना भी जरूरी है। -नितिन भाटिया, दुकानदार
बजट में मार्केट के लिए किए गए प्रावधानों का स्वागत है। इस दिशा में पहल के लिए दुकानदारों और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद पुनर्विकास योजना पर जल्द पहल से मार्केट की शक्ल बदलने की उम्मीद है। मार्केट में ग्राहकों की सुरक्षा के लिए यहां पिंक बूथ, सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। पुलिस के साथ साथ सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहते हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने की वजह से ग्राहक पहुंचते हैं। -अशोक कालरा, दुकानदार
मार्केट में घूम घूमकर सामान बेचने वालों की संख्या अधिक है। कई बार भीड़भाड़ में ग्राहकों को इस वजह से दिक्कत होती है, उनकी संख्या नियत होनी चाहिए। खान पान के लिए मोमोज, नूडल्स सहित खानपान की भी सुविधा भी दुकानों के इर्द गिर्द है। फूड वैन पर भी शाम के वक्त ग्राहकों की खूब भीड़ रहती है। सुविधाएं बढ़ने से कर्मियों के लिए रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। -हरीश, विक्रेता
तीसरी पीढ़ी फिलहाल रेस्तरां को चला रही है। मेरे पिता और दादा भी इसी मार्केट से आगे बढ़े। समय में बदलाव के साथ हमने भी ग्राहकों की मांग के मुताबिक कुछ बदलाव किए। लेकिन व्यंजनों के स्वाद से समझौता नहीं किया। वेज या नॉन वेज, अभी भी पुराने लोग खाना खाने के लिए पहुंचते हैं। मार्केट के पुनर्विकास से हालात बदलेंगे और कारोबार में भी इजाफा होगा। इससे ग्राहकों को भी काफी राहत मिलेगी। -सुरजीत सिंह, रेस्तरां मालिक