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दिल्ली का सरोजनी नगर मार्केट: लेटेस्ट फैशन, युवाओं की भरमार और 360 करोड़ का कारोबार

Tue, 29 Mar 2022 01:02 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरोजनी नगर मार्केट पहुंचने के लिए मेट्रो की सुविधा सबसे अधिक लोकप्रिय है। गेट नंबर-तीन से महज 150 मीटर की दूरी पर मेट्रो स्टेशन है तो मार्केट से निकलते ही चंद कदम चलते ही बस, ऑटो, टैक्सी की सुविधा है। मार्केट में रोजाना करीब 50 हजार ग्राहक पहुंचते हैं। 
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सरोजनी नगर मार्केट - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दिल्ली सरकार बाजारों के पुनर्विकास के सहारे नौजवानों को रोजगार देने की योजना पर काम कर रही है। बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान भी किया गया है। मंगलवार को दिल्ली सरकार के वित्त विभाग ने कारोबारियों को सलाह-मशविरे के लिए विधान सभा में बुलाया है। योजना है कि दिल्ली के बाजारों को उनकी तासीर के हिसाब से विकसित किया जाए। बाजार जरूरत के हिसाब से बेहतर होंगे। इससे ग्राहकों को पसंदीदा सामान मिलेगा, कारोबारियों को कारोबार और नौजवानों को नौकरी। सरकार की कोशिश के बीच अमर उजाला की यह श्रृंखला दिल्ली के प्रमुख बाजारों की मौजूदा हालात पर रोशनी डालेगी। पहले अंक में सर्वेश कुमार के साथ चलते हैं, दिल्ली के मशहूर बाजार सरोजनी नगर मार्केट में...

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सार्वजनिक परिवहन से पहुंचना आसान 
सरोजनी नगर मार्केट पहुंचने के लिए मेट्रो की सुविधा सबसे अधिक लोकप्रिय है। गेट नंबर-तीन से महज 150 मीटर की दूरी पर मेट्रो स्टेशन है तो मार्केट से निकलते ही चंद कदम चलते ही बस, ऑटो, टैक्सी की सुविधा है। 

मार्केट में रोजाना करीब 50 हजार ग्राहक पहुंचते हैं। अवकाश और त्योहार के मौके पर ग्राहकों की संख्या एक लाख या इससे अधिक भी होती है। मेट्रो स्टेशन गेट नंबर-तीन के बाहर है, तो रिंग रोड सहित बस और बस स्टॉप भी चंद मीटर की दूरी पर हैं।
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निजी वाहनों की पार्किंग के लिए मार्केट में चार छोटी पार्किंग हैं। एक मल्टीलेवल पार्किंग भी हैं, लेकिन एक कार को पार्किंग तक पहुंचने में सात मिनट का वक्त लगता है। छोटी पार्किंग में कम संख्या में कारें पार्क हो सकती हैं।
 

70 साल पहले हुई थी शुरुआत

विभाजन के वक्त दिल्ली पहुंचे शरणार्थियों ने जीविकोपार्जन के लिए 1952 दुकानें शुरू की गई थी। 200 दुकानें पहले अलॉट की गई, फिर बाद में सब्जी मार्केट, बाबू पार्कट सहित छोटी मार्केट में दुकानों की संख्या बढ़कर 450 से अधिक हो गई। कम कीमत में नए फैशन और गुणवत्ता उत्पादों की खरीदारी के लिए रोजाना हजारों ग्राहक पहुंचते हैं। 

30 करोड़ रुपये का हर महीने होता है कारोबार
दुकानों में हर रोज करीब एक करोड़ यानि हर महीने औसतन 30 करोड़ रुपये के उत्पादों की बिक्री होती है। डिजाइनर कपड़े, जूते, चश्मे, बैग सहित जरूरी सामानों की कई दुकानें हैं। दुकानदारों का दावा है कि सरोजनी नगर मार्केट में लेटेस्ट कपड़े या दूसरे सामान कम कीमत में खरीदने के लिए रोजाना हजारों युवा पहुंचते हैं।
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वाई फाई की निशुल्क सुविधा से बढ़ेगा कारोबार

सभी बंदिशें हटाने के बाद मार्केट में फिर ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। पहुंचने के लिए बस, मेट्रो, ऑटो, टैक्सी और ई रिक्शा की सुविधा है। मेट्रो से पहुंचने वालों की संख्या सबसे अधिक है। पार्किंग और महिलाओं के लिए टॉयलेट की संख्या में बढ़ोतरी जरूरी है। 1990 के दशक के बाद मार्केट में टाइल्स, रंगाई या कोई और काम नहीं किए गए हैं। मोबाइल नेटवर्क के लिए वाई फाई की सुविधा न होने से रोजाना सैकड़ों ग्राहकों को खरीदारी के बाद भी ऑनलाइन भुगतान की सुविधा न होने पर एटीएम का रुख करना पड़ता है। दिल्ली के अधिकतर क्षेत्रों में मिलने वाली वाई फाई की सुविधा एसएन मार्केट में भी होगी तो ग्राहकों और कारोबारियों की परेशानी कम होंगी। -अशोक रंधावा, दुकानदार

अंडरग्राउंड पार्किंग से ग्राहकों को मिलेगी राहत
पार्किंग के लिए अंडरग्राउंड पार्किंग का होना बेहद जरूरी है। इसके न होने से ग्राहकों को रोजाना परेशानी होती है। छोटी पार्किंग में अगर जगह नहीं मिली तो बाहर में घूमने वाले क्रेन कभी भी वाहनों को उठा ले जाते हैं। पार्किंग की सुविधा ऐसी हो ताकि कम समय में अधिक से अधिक लोगों को इस्तेमाल का मौका मिल सके। हाल ही में एनडीएमसी ने एक पिंक टॉयलेट की शुरुआत की है, लेकिन महिलाओं की सुविधा के लिए संख्या में बढ़ोतरी जरूरी है। बच्चों के साथ पहुंचने वाली महिलाओं के फीडिंग सेंटर का होना भी जरूरी है। -नितिन भाटिया, दुकानदार

बजट में मार्केट के लिए किए गए प्रावधानों का स्वागत है। इस दिशा में पहल के लिए दुकानदारों और सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद पुनर्विकास योजना पर जल्द पहल से मार्केट की शक्ल बदलने की उम्मीद है। मार्केट में ग्राहकों की सुरक्षा के लिए यहां पिंक बूथ, सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। पुलिस के साथ साथ सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहते हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने की वजह से ग्राहक पहुंचते हैं। -अशोक कालरा, दुकानदार

मार्केट में घूम घूमकर सामान बेचने वालों की संख्या अधिक है। कई बार भीड़भाड़ में ग्राहकों को इस वजह से दिक्कत होती है, उनकी संख्या नियत होनी चाहिए। खान पान के लिए मोमोज, नूडल्स सहित खानपान की भी सुविधा भी दुकानों के इर्द गिर्द है। फूड वैन पर भी शाम के वक्त ग्राहकों की खूब भीड़ रहती है। सुविधाएं बढ़ने से कर्मियों के लिए रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।  -हरीश, विक्रेता

तीसरी पीढ़ी फिलहाल रेस्तरां को चला रही है। मेरे पिता और दादा भी इसी मार्केट से आगे बढ़े। समय में बदलाव के साथ हमने भी ग्राहकों की मांग के मुताबिक कुछ बदलाव किए। लेकिन व्यंजनों के स्वाद से समझौता नहीं किया। वेज या नॉन वेज, अभी भी पुराने लोग खाना खाने के लिए पहुंचते हैं। मार्केट के पुनर्विकास से हालात बदलेंगे और कारोबार में भी इजाफा होगा। इससे ग्राहकों को भी काफी राहत मिलेगी। -सुरजीत सिंह, रेस्तरां मालिक
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