परिषद ने वर्ष 2012 में दिल्ली-सहारनपुर योजना मंडोला के नाम से लांच की थी। शुरुआत में पांच हजार फ्लैटों के लिए छह हजार आवेदन आए थे।
सभी को फ्लैट भी आवंटित कर दिए गए, लेकिन एक साल बाद ही दो हजार लोगों ने रिफंड मांग लिया। परिषद ने योजना को दोबारा लांच किया और दो हजार फ्लैट निकाले।
मगर अब भी लोग रिफंड मांग रहे हैं। अफसरों की मानें तो लोनी में आपराधिक गतिविधियों के चलते योजना को खरीदार नहीं मिल रहे हैं।
आवास सचिव आरपी सिंह ने बताया कि मामले में एक रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे पुलिस अधिकारियों को भेजा जाएगा।
इसमें क्राइम रोकने संबंधी सुझाव दिए जाएंगे। परिषद योजना को हिट करने के लिए इसका नाम हाईटेक रखा जा सकता है।
प्राइवेट प्रोजेक्ट्स में भी खरीदार नहीं
भोपुरा और लोनी के बीच बन रहे 20 से ज्यादा प्राइवेट प्रोजेक्ट्स को भी खरीदार नहीं मिल रहे हैं। बिल्डर एसोसिएशन के सचिव मनोज गोयल ने बताया कि लोनी रोड पर दर्जनभर से अधिक प्रोजेक्टस में 70 फीसदी से अधिक फ्लैट खाली हैं।
खरीदार नहीं मिलने के चलते प्रोजेक्ट अधूरे हैं। प्रोजेक्ट्स की बुकिंग शुरू हुए तीन साल से अधिक बीत चुके हैं मगर किसी भी प्रोजेक्ट की बुकिंग अभी तक 30 फीसदी से अधिक नहीं हुई।