हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगों के दौरान एक पुलिसकर्मी पर पिस्टल तानने के मामले के आरोपी शाहरुख पठान की जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा है। दंगों के दौरान हथियारों से लैस भीड़ द्वारा किए गए हमले में कई पुलिसकर्मियों को चोटें आई थीं और एक पुलिसकर्मी रोहित शुक्ला को गोली लगी थी।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने मामले की सुनवाई 16 मार्च तय करते हुए पुलिस को चार सप्ताह में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। निचली अदालत ने हाल ही में पठान की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने माना कि संबंधित स्थान पर लगे कैमरे के सीसीटीवी फुटेज में दंगाइयों में उसकी मौजूदगी दिखाई दे रही है। सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड उसकी उपस्थिति स्पष्ट कर रही है।
पठान की ओर से पेश वकील खालिद अख्तर ने सुनवाई के दौरान एमएलसी में समय के बीच विभिन्न विसंगतियों का हवाला देते हुए कहा कि पठान तीन अप्रैल 20 से हिरासत में है और मामले में जांच पूरी हो गई है। उन्होंने कहा पठान गवाहों को धमकाने या प्रभावित करने की स्थिति में नहीं है और मुकदमे में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में जमानत स्वीकार की जाए।
पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता अनुज हांडा ने मामले में जमानत आवेदन पर आपत्ति जताते हुए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने कहा कि पठान पहले ही लगभग एक साल और 9 महीने से हिरासत में है और एफआईआर में हत्या का आरोप नहीं है और मामले में आरोप पत्र भी दायर किया गया है।
पठान के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 186, 188, 153ए, 283, 353, 332, 323, 307, 505 और 120बी सहित आईपीसी धारा 34 के और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
घायल पुलिसकर्मी रोहित शुक्ला ने अपने बयान में कहा था कि पिछले साल 24 फरवरी को लोगों के दो समूह में से एक अल्लाहु अकबर के नारे लगाते हुए सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहा था। इसी दौरान भीड़ हिंसक हो गई और पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान एक व्यक्ति ने उस पर पिस्तौल से गोली चला दी।