पुलिस ने जबरन कार से बाहर निकाला
पत्रकार राहुल शाह ने पुलिस के दावे का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और प्रेस आईडी सहित सभी पहचान पत्र दिखाए थे। शाह ने पीटीआई से कहा, 'पुलिस ने हमारी कोई दलील नहीं सुनी और मुझे मेरी बेल्ट से पकड़कर जबरन कार से बाहर निकाला। मेरी पत्नी, जो एक पत्रकार हैं उन्होंने घटना का वीडियो बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।'
पुलिस ने बिना उचित सत्यापन के कार्रवाई की
शाह ने अपने बयान में कहा, '19 जून को सेक्टर-38 के पेट्रोल पंप पर ईंधन भरते समय, दिल्ली पुलिस के तीन अधिकारियों ने मुझे गलत तरीके से पकड़ लिया। वे 'राहुल' नामक एक साइबर अपराधी की तलाश कर रहे थे और सिर्फ नाम के मिलान के आधार पर मुझे कार से बाहर खींचकर एक निजी गाड़ी में जबरन डालने की कोशिश की।' उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने भी अपना आधिकारिक पहचान पत्र दिखाया, लेकिन पुलिस ने बिना उचित सत्यापन के कार्रवाई की।
पुलिस का माफीनामा
पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि कोई दुर्व्यवहार या बल प्रयोग नहीं किया गया। डीसीपी गौतम ने बताया, 'जैसे ही पुष्टि हुई कि व्यक्ति संदिग्ध नहीं है, टीम ने खेद व्यक्त किया और बातचीत से हट गई।' इस घटना का एक आंतरिक नोट बनाया गया है और कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सोशल मीडिया पर हंगामा
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा। वीडियो में पत्रकार और उनकी पत्नी को पुलिस से बहस करते और अपनी पहचान साबित करने की कोशिश करते देखा जा सकता है। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, खासकर संदिग्धों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर।
पुलिस ने कहा कि वे मूल मामले की जांच जारी रखेंगे, लेकिन पत्रकार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस और जनता के बीच विश्वास की कमी को उजागर किया है। पत्रकार राहुल शाह ने इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।