दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने संयुक्त अभियान में ड्रग्स तस्करी के अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने नाइजीरियाई युवती फेथ राचेल को महरौली से गिरफ्तार कर 3.8 किलो मेस्कलाइन ड्रग्स बरामद की है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 15 करोड़ से ज्यादा बताई रही है। दिल्ली पुलिस अधिकारियों की मानें तो मेस्कलाइन ड्रग्स दिल्ली में पहली बार पकड़ी गई है। यह रूस के अलावा दक्षिणी अमेरिकी देश पेरू और इक्वाडोर में सैन पेड्रो कैक्टस से बनाई जाती है।
स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त अमित कौशिक ने बताया कि बरामद साइकोट्रोपिक पदार्थ मेस्कलाइन विदेश से तस्करी कर लाया गया था और इसे दिल्ली में सप्लाई किया जाना था। इसे टॉफियों और मछली के भोजन की पैकिंग में लाया गया था। मेस्कलाइन को पार्टी ड्रग्स के रूप में जाना जाता है। इसमें एलएसडी और साइलोसाइबिन (मैजिक मशरूम) के समान ही मतिभ्रम पैदा करने वाले प्रभाव होते हैं।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि सेल की ट्रांस यमुना रेंज में तैनात एसीपी कैलाश सिंह बिष्ट की करीबी निगरानी में इंस्पेक्टर राहुल कुमार और विनीत कुमार तेवतिया की टीम ने ड्रग्स तस्करी के गिरोह का 14 अगस्त को पर्दाफाश किया।
मेडिकल वीजा पर भारत आई थी फेथ राचेल
नाइजीरिया के लागोस की रहने वाली महिला फेथ राचेल अगस्त 2022 में मेडिकल वीजा पर भारत आई थी। वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद वह वापस नहीं लौटी। वह एक नाइजीरियाई नागरिक के संपर्क में आई और नशीले पदार्थों की तस्करी शुरू कर दी। जनवरी 2024 में उक्त नाइजीरियाई नागरिक अपने देश लौट गया। इसके बाद फेथ राचेल नारकोटिक्स ड्रग्स कार्टेल का हिस्सा बन गई और नाइजीरिया में रहने वाले उक्त व्यक्ति की मदद से नशीले पदार्थ की खेप एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती थी।
पहली बार भारत लाई गई मेस्कलाइन
मेस्कलाइन ड्रग्स को पहली बार भारत लाया गया है। यह प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला साइकेडेलिक है। मेस्कलाइन पाउडर, टैबलेट, कैप्सूल या तरल रूप में हो सकता है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को अप्रैल 2024 के पहले सप्ताह में पता चला था कि एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट दिल्ली और एनसीआर में नशीले पदार्थों की आपूर्ति में लिप्त है।