पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लापता बच्चों के कारणों के विश्लेषण से पता चला कि ज्यादातर मामलों में बच्चे घर पर माता-पिता के डांट, अकादमिक दबाव, अपना रास्ता भटकने, भागने आदि कारणों से लापता हो जाते हैं।
राजधानी दिल्ली में हर साल हजारों बच्चे लापता हो जाते हैं। लापता बच्चों को तलाशना पुलिस के लिए एक चुनौती भरा काम है। दिल्ली पुलिस ने इस चुनौती को स्वीकार कर इस वर्ष कई तरह के अभियान चलाए। कई परिवारों को उनकी खुशियां लौटाईं। अब भी गायब हुए करीब डेढ़ हजार परिवारों को अपने बच्चे के मिलने का इंतजार है।
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दिल्ली पुलिस के आंकड़े के मुताबिक, वर्ष 2021 में आठ से कम उम्र के बच्चों से लेकर 18 उम्र के 5772 बच्चे और युवक गायब हुए थे। जिसमें पुलिस ने अब तक 4293 बच्चों और युवक को सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गायब हुए बच्चों को तलाशने के लिए पुलिस ऑपरेशन स्माइल और ऑपरेशन मुस्कान अभियान चलाया। पुलिस के मुताबिक, इस वर्ष 457 आठ साल व उससे कम उम्र के बच्चे गायब हुए थे। इसके अलावा आठ से 12 साल के 480 और 12 साल से 18 साल के बीच 4835 किशोर और युवक गायब हो गए थे। जिसमें पुलिस ने आठ साल व उससे कम उम्र के 339 बच्चों, आठ से बारह वर्ष के बीच 393 और 12 से 18 साल के 3561 किशोर और युवक को सकुशल बरामद कर लिया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि लापता बच्चों के कारणों के विश्लेषण से पता चला कि ज्यादातर मामलों में बच्चे घर पर माता-पिता के डांट, अकादमिक दबाव, अपना रास्ता भटकने, भागने आदि कारणों से लापता हो जाते हैं। अपराध शाखा ने मामलों की जांच की और इस बात का पता लगाया कि बच्चों के अपहरण में कोई संगठित गिरोह तो नहीं है। लेकिन जांच में पता चला कि राजधानी में कोई ऐसा गिरोह सक्रिय नहीं है। पुलिस ने लाल बत्ती पर बच्चों से भीख मंगवाने को लेकर भी जांच की, लेकिन उसमें भी कोई संगठित गिरोह की बात सामने नहीं आई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली पुलिस ऑपरेशन स्माइल, पहचान और ऑपरेशन मुस्कान योजना चलाकर आश्रय गृह, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा पर लापता बच्चों की तलाश करने में जुटी है।