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दिल्ली पुलिस की काली करतूत, रिश्वत में मांगे एक करोड़, पहली किश्त मिलते ही खुल गई सच्चाई

Wed, 05 Dec 2018 05:00 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली पुलिस की वर्दी एक बार फिर दागदार हो गई। बाहरी जिले के रणहौला थाने के पुलिसकर्मियों ने ठगी के एक आरोपी को अगवा कर उसके परिवार से उसे छोड़ने की एवज में डेढ़ करोड़ रुपये मांगे। एक करोड़ में सौदा तय हो गया। पहली किस्त के रूप में 11 लाख रुपये दे भी दिए गए। बाकी रुपये देने के समय बात बिगड़ी, तो आरोपी की पत्नी ने पीसीआर कॉल कर दी। मौर्या एंक्लेव थाना पुलिस पहुंची और छानबीन के बाद रणहौला थाने के एएसआई सूबे सिंह, हवलदार इंदु परमार और सिपाही अजय के अलावा सचिन नामक एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया।

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वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रणहौला थाने के एसएचओ को लाइन हाजिर कर विभागीय जांच के आदेश दे दिए। बाहरी जिले में डीसीपी स्तर के अधिकारी पूरे मामले की छानबीन कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में ठगी के मामले में 28 सितंबर को एक एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इनमें एक आरोपी दिल्ली के कंझावला निवासी प्रदीप प्रधान था। रणहौला थाने में तैनात एएसआई सूबे सिंह, हवलदार इंदु परमार व सिपाही अजय ने प्रदीप को उसके घर से उठाकर अवैध रूप से उत्तम नगर में सचिन नामक शख्स के घर पर रखा। इसके बाद परिवार से सौदेबाजी शुरू कर दी।

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पुलिसकर्मियों ने प्रदीप को छोड़ने की एवज में डेढ़ करोड़ रुपये मांगे। सौदा एक करोड़ रुपये में तय हो गया। प्रदीप की पत्नी नेहा प्रधान ने रविवार को पुलिसकर्मियों को 11 लाख रुपये की पहली किस्त दे भी दी। बाकी रुपये मंगलवार को देने की बात की गई। पुलिसकर्मियों ने बाकी रुपये देने के लिए नेहा को मौर्या एंक्लेव बुलाया। नेहा अपने दो जानकारों के साथ रुपये लेकर मौर्या एंक्लेव पहुंची, जहां नेहा ने अपने पति को दिखाने की बात की। इस पर दोनों की बात बिगड़ गई और नेहा ने पीसीआर कॉल कर दी।

मौके पर उत्तर-पश्चिम जिले की मौर्या एंक्लेव थाना पुलिस पहुंची। छानबीन के बाद तीनों पुलिसकर्मियों व सचिन को हिरासत में ले लिया गया। नेहा के बयान पर जबरन वसूली और अपहरण का मामला दर्ज कर लिया गया।

इधर, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। वहीं प्रदीप को उत्तम नगर स्थित सचिन के मकान से मुक्त करा लिया गया।  सचिन पुलिस का मुखबिर है। इसी की सूचना पर पुलिसकर्मियों ने प्रदीप को उठाया था। सूत्रों का कहना है कि उसे दो दिन तक रणहौला थाने में भी रखा गया था। इस मामले में रणहौला थाने की भूमिका के जांच के आदेश दे दिए गए।

फिलहाल जांच होने तक उनको लाइन में भेज दिया गया। बाहरी जिले में एक डीसीपी स्तर के अधिकारी को रणहौला थाने के पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच करने के लिए कहा गया है। वहीं पुलिस इस बात का भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस की तो कोई भूमिका नहीं है।
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