जेएनयू छात्र शरजिल इमाम (फाइल फोटो)
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दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को जामिया हिंसा के मामले में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील की जमानत याचिका के विरोध में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। शरजील ने 25 अप्रैल के निचले अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट ने कहा है कि शरजील इमाम के खिलाफ जांच के लिए और समय की जरूरत है। इस काम में व्हाट्सएप और टेलीफोनिक कॉल के माध्यम से मदद ली जा रही है। जांच एजेंसी ने कोरोनावायरस (कोविड-19) के चलते लागू लॉकडॉउन के दौरान शरजील से व्हाट्सएप और टेलिफोनिक कॉल के माध्यम से संपर्क किया था।
दिल्ली पुलिस ने हलफनामे में कहा कि इमाम ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ बयान दिया था। पुलिस ने कहा कि इमाम किसी भी तरह की राहत पाने के योग्य नहीं है। इमाम की याचिका का विरोध करते हुए पुलिस ने कहा कि इमाम का भाषण सांप्रदायिक था और इसने धर्मों के बीच नफरत पैदा की।
दिल्ली पुलिस ने इस रिपोर्ट में शरजील इमाम की जमानत का विरोध किया गया है। दरअसल शरजील ने 25 अप्रैल के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है जिसमें दिल्ली पुलिस को गैर कानूनी गतिविधि (निरोधक) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में जांच पूरी करने के लिए 90 दिन की तय सीमा से अतिरिक्त समय की इजाजत दी गई थी।
शरजील ने जमानत याचिका में कहा था कि अगर पुलिस तय समय में जांच पूरी नहीं कर पाती तो ऐसी स्थिति में आरोपी जमानत का हकदार है, लेकिन कोर्ट ने पुलिस को जांच के लिए और समय दे दिया और उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।