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गोपीनाथ मुंडे की मौत में नया खुलासा

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जिस अरविंदो-तुगलक रोड-पृथ्वीराज चौराहे पर ग्रामीण विकास मंत्री रहे भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की मौत हुई थी, उससे तुगलक रोड थाना महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर है।
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घटनास्थल से तुगलक रोड थाने में मंत्री के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना पहुंचने में 18 मिनट से ज्यादा का समय लग गया और थाने के पुलिसकर्मियों को मौके पर पहुंचने में करीब 50 मिनट लग गए।

यह हालत तब है, जब पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी ने पिछले महीने ही घोषणा की थी कि 100 नंबर की कॉल सीधे थाने भी जाएगी। दूसरी तरफ मुंडे की सड़क दुर्घटना में मौत मामले की जांच सोमवार तक सीबीआई को दी जा सकती है।
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इन 18 मिनट ने डाला असर

नई दिल्ली जिला पुलिस अधिकारियों के अनुसार सड़क दुर्घटना के बाद गोपीनाथ मुंडे का स्टाफ उन्हें एम्स के ट्रामा सेंटर ले गया था।

मौके पर मौजूद आरोपी इंडिका कार के चालक गुरविंदर ने सड़क दुर्घटना की सूचना 100 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम को सुबह करीब 6.26 बजे दी थी। यह कॉल आईटीओ स्थित पुलिस हेडक्वार्टर के कंट्रोल रूम में गई।

वहां से नई दिल्ली जिले के कंट्रोल रूम में गई। इसके बाद नई दिल्ली जिले केकंट्रोल रूम से सूचना तुगलक रोड थाना पुलिस को दी गई। इस पूरी प्रक्रिया में 18 मिनट से ज्यादा का समय लग गया।
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कहीं चुकाना न पड़े इस लेटलतीफी बड़ा परिणाम

सूचना मिलने के बाद तुगलक रोड थाने का एएसआई सात रेसकोर्स रोड स्थित प्रधानमंत्री आवास की तरफ तुगलक रोड पर 6.58 बजे पहुंचा, मगर वहां उसे घटनास्थल नहीं मिला। एएसआई ने फिर सूचना देने वाले गुरविंदर को फोन कर घटनास्थल केबारे में पूछा।

गुरविंदर ने जब बताई तब एएसआई सुबह करीब 7.15 बजे घटनास्थल पर पहुंचा। एएसआई को मौके पर पहुंचने में 50 मिनट से ज्यादा का समय लग गया।

इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली पुलिस का पीसीआर सिस्टम कितनी लेटलतीफी से चलता है। वसंत विहार गैंगरेप और लिकर किंग पोंटी चड्ढा मामले में भी पुलिस काफी देर से मौके पर पहुंची थी।
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