आरोपी ने पूछताछ में बताया कि वह पहले बीएसएफ में रसोइया की नौकरी करता था। साल 2007 में उसने जयपुर में सिक्योरिटी एजेंसी खोली। उसमें उसने 60 कर्मचारियों को रखा। बाद में उसने ये कंपनी एक्स-सर्विसमैन राकेश मोहन को बेच दी। इसके बाद बाद उसने मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनी मिताशी मार्केटिंग एंड कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड में एजेंट के तौर पर काम किया। उसने यहां डेढ़ करोड़ रुपये कमाए। साल 2008 में उसने अपनी नई कंपनी मिताशी ट्रेड लिंक एंड प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी खोली। यह कंपनी में एमडी था। कंपनी में विजेंद्र सिंह चेमरमैन, डीसी यादव एग्जीक्यूटिव डायेरक्टर, मदनमोहन मीणा डायरेक्टर के पर कार्यरत था। यह कंपनी नए सदस्यों को लाने पर कमीशन देती थी। नए सदस्य को 4000 रुपये जमा कराने होते थे। ज्वाइनिंग करने पर उसे 400 रुपये का एक सफारी सूट दिया जाता था।
आरोपी लोगों को बड़े मुनाफे का लालच देता था
प्रत्येक व्यक्ति को आगे कम से कम 10 लोगों को जोड़ना होता था। ये एक वर्ष तक प्रत्यके महीने दो लाख रुपये का व्यवसाय देने का वादा करता था। साथ में एक मोटरसाइकिल भी देता था। इस तरीके से हजारों लोगों ने कुछ ही समय में 100 करोड़ से ज्यादा की रकम जमा कर दी। इसके बाद आरोपी कंपनी को बंद कर फरार हो गया। वर्ष 2011 में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए थे। इस कारण वह राजस्थान से भागकर इंदौर चला गया। वहां उसने एक को-ऑपरेटिव सोसाइटी का लाइसेंस लिया था। वहां पर वह राम मारवाड़ी के नाम से रहता था। यहां इसे घाटा हो गया तो वर्ष 2014 में ये दिल्ली आ गया। यहां पर प्रॉपर्टी का कारोबार करने लगा। वर्ष 2018 में इसने कैशबैक बाजार नाम से नजफगढ़ में ग्रॉसरी स्टोर खोला था, लेकर वह भी नहीं चला।
दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार हुआ
वर्ष 2020 में नजफगढ़ पुलिस ने उसे दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय इसने अपना नाम राम मारवाड़ी बताया था। इस कारण इसका भेद नहीं खुला था। वर्ष 2021 में इसने अपना कार्ट नाम से ई-कॉमर्स प्लेटफार्म शुरू किया। वह फिलहाल इंदौर में किराए के मकान में रहता था।