जाट रेजीमेंट में तैनात श्रीभगवान 1965 की लड़ाई में शहीद हुए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अपने हाथ से पत्र लिखकर उनकी पत्नी शांति देवी को सांत्वना दी थी। वह पत्र दिखाते हुए उनके भाई ओमप्रकाश की आंखों में आंसू आ गए।
शासन प्रशासन और जन प्रतिनिधियों से लगा रहे गुहार
पीड़ित परिवार शासन प्रशासन और जन प्रतिनिधियों से मदद की गुहार लगा रहे हैं। इन परिवार का दुख बांटने के लिए क्षेत्रीय विधायक विजेंद्र गोयल भी पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि दिल्ली सरकार इस मामले से दिल्ली के उपराज्यपाल को अवगत कराएगी।
राज्य सैनिक बोर्ड के अधिकारी कुछ भी कहने से बचते रहे
राज्य सैनिक बोर्ड के अधिकारी इस बाबत कोई भी आधिकारिक बयान देने से इंकार कर रहे हैं। एक अधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि सैनिक सदन में एक्स सर्विस मैन को सिर्फ पांच साल के लिए आवास दिया था न कि उनके परिवार को। दिल्ली हाईकोर्ट ने 2013 में ऐसे घरों को खाली करने का आदेश भी दिया था। अब सवाल यह उठता है अगर यह आवास महज पांच साल के लिए दिए गए थे तो इन्हें तभी खाली क्यों नहीं कराया। अब 51 साल बाद यहां रहने वाले कहां जाएंगे, इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है।