मेरठ निवासी पूर्णिमा, पटना निवासी जाह्नवी जैसी सैकड़ों कर्मी रोजमर्रा की मुश्किलों से जूझ रही हैं। गुरुग्राम स्थित एक बीपीओ में कार्यरत जाह्नवी को पीजी में रहने और खाने की परेशानी हुई तो वह सोमवार को एक रिश्तेदार के घर चली गईं। मेरठ निवासी पूर्णिमा के परिजनों ने तमाम कोशिशें कीं, लेकिन उन्हें आनंद विहार बस अड्डे तक पहुंचने के लिए यातायात की सुविधा नहीं मिली। अब पूर्णिमा भी अपने एक रिश्तेदार के घर जाने की तैयारी कर रही हैं।
पैसे तो हैं पर समस्या से निजात नहीं
पीजी में रहने वाली अधिकतर कर्मियों को वहीं खाने की सुविधा मिलती है, लेकिन लॉकडाउन के बाद से वहां हालात बुरे हैं। उनके लिए न तो किचन है और न ही खाना बनाने का कोई इंतजाम। लॉकडाउन के दौरान उनके पास पैसे तो हैं, लेकिन खाने-पीने सहित रोजमर्रा की जरूरतों की चीजों के लिए परेशान हैं।