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दिल्ली-एनसीआर में दमघोंटू स्तर पर पहुंचा प्रदूषण, दिवाली तक हालात और ज्यादा खराब होने की चेतावनी

Thu, 25 Oct 2018 08:55 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली में बुधवार को हवा की शुद्धता का स्तर अचानक ‘बहुत खराब’ के स्तर पर पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्र के ही वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान व अनुसंधान संस्थान (सफर) ने बुधवार को हवा की गुणवत्ता में अचानक बेहद गिरावट दर्ज की।

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भलस्वा लैंडफिल साइट पर 20 अक्तूबर से लगी आग के कारण निकल रहे जहरीले धुएं से स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, दिवाली तक राजधानी व आसपास के क्षेत्र प्रदूषण के ‘घातक कॉकटेल’ में घिर सकते हैं।

दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर अतुल गर्ग ने बुधवार शाम को बताया कि कूड़े में पिछले कई दिन से लगी आग को बुझाने के लिए फायरकर्मी पूरा प्रयास कर रहे हैं, लेकिन यह आसानी से काबू में नहीं आ रही है। मौके पर फायर सर्विस की 15 गाड़ियां लगी हुई हैं।
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आग बुझाने के लिए पानी के अलावा निर्माण के मलबे और मिट्टी का भी उपयोग किया जा रहा है। गर्ग ने बताया कि कूड़े से निकल रही मीथेन गैस के कारण आग बार-बार भड़क रही है। मंगलवार को उत्तरी दिल्ली के मेयर आदेश गुप्ता व एनडीएमसी कमिश्नर मधुप व्यास ने भी मौके का निरीक्षण किया था और इस लैंडफिल साइट की समस्या का निपटारा करने के लिए लांग-टर्म व शार्ट-टर्म, दोनों तरह के उपाय करने की घोषणा की थी।

जून के बाद सबसे खराब डाटा

- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, हालात इतने खराब हैं कि यदि हम प्रदूषण के ‘खराब’ स्तर तक भी वापसी कर पाए तो यह बड़ी उपलब्धि होगा। बोर्ड के अनुसार, बुधवार को आधे से ज्यादा मॉनीटरिंग स्टेशनों पर हवा की शुद्धता के स्तर का डाटा जून में आए आंधी तूफान के बाद सबसे खराब स्थिति का संकेत दे रहा था।

हवा की गति में कमी से भी बढ़ी परेशानी
प्रदूषण विभाग के अधिकारी पूरे शहर में हवा की शुद्धता के बेहद खराब स्तर पर पहुंचने के लिए तापमान में आई गिरावट और हवा की गति में कमी को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। हवा की गति घटने से प्रदूषित गैस स्थानीय वातावरण में ही बढ़ती रहती है, जिसके कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है।

तापमान में गिरावट के कारण ये गैस ठंडी होकर वातावरण के निचले हिस्से में आकर सीधे श्वसन क्रिया से जुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी जैसे हालात पैदा होते हैं। इस अधिकारी ने हवा की शुद्धता का स्तर 7 नवंबर को आने वाली दिवाली तक लगातार खराब होने की संभावना जताई है।
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पिछले साल भी खराब हुई थी स्थिति

- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल दिल्ली समेत उत्तर भारत के अधिकतर इलाकों को जहरीले स्मॉग ने ढक लिया था, जिसके लिए खेतों में पराली जलाने और दिवाली पर असंख्य पटाखे चलाए जाने को जिम्मेदार माना गया था। इसके चलते कोयले से बिजली बनाने वाले कई पॉवर स्टेशन बंद करने, कंस्ट्रक्शन पर प्रतिबंध लगाने और कूडृा जलाने पर रोक लगाने जैसे कदम उठाने पड़े थे।

दिल्ली ही नहीं देश के हालात खराब
इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार, विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं, जिनमें प्रदूषण के हिसाब से दिल्ली छठे नंबर पर है।

ऐसे रहे बुधवार को दिल्ली में हालात
339 पीपीएम का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) रहा दिल्ली का
600 पीपीएम आंकी गई दो मॉनीटरिंग स्टेशनों पर हवा की शुद्धता
500 पीपीएम तक रहा हवा में प्रदूषण का स्तर अधिकतर मॉनीटरिंग स्टेशनों पर
50 पीपीएम की अधिकतम मात्रा वाली हवा को माना जाता है शुद्ध
301 से 400 के बीच बेहद खराब व 401 से 500 के बीच अति गंभीर होता है स्तर
(केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार)
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