केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, हालात इतने खराब हैं कि यदि हम प्रदूषण के ‘खराब’ स्तर तक भी वापसी कर पाए तो यह बड़ी उपलब्धि होगा। बोर्ड के अनुसार, बुधवार को आधे से ज्यादा मॉनीटरिंग स्टेशनों पर हवा की शुद्धता के स्तर का डाटा जून में आए आंधी तूफान के बाद सबसे खराब स्थिति का संकेत दे रहा था।
हवा की गति में कमी से भी बढ़ी परेशानी
प्रदूषण विभाग के अधिकारी पूरे शहर में हवा की शुद्धता के बेहद खराब स्तर पर पहुंचने के लिए तापमान में आई गिरावट और हवा की गति में कमी को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। हवा की गति घटने से प्रदूषित गैस स्थानीय वातावरण में ही बढ़ती रहती है, जिसके कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है।
तापमान में गिरावट के कारण ये गैस ठंडी होकर वातावरण के निचले हिस्से में आकर सीधे श्वसन क्रिया से जुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी जैसे हालात पैदा होते हैं। इस अधिकारी ने हवा की शुद्धता का स्तर 7 नवंबर को आने वाली दिवाली तक लगातार खराब होने की संभावना जताई है।
पिछले साल दिल्ली समेत उत्तर भारत के अधिकतर इलाकों को जहरीले स्मॉग ने ढक लिया था, जिसके लिए खेतों में पराली जलाने और दिवाली पर असंख्य पटाखे चलाए जाने को जिम्मेदार माना गया था। इसके चलते कोयले से बिजली बनाने वाले कई पॉवर स्टेशन बंद करने, कंस्ट्रक्शन पर प्रतिबंध लगाने और कूडृा जलाने पर रोक लगाने जैसे कदम उठाने पड़े थे।
दिल्ली ही नहीं देश के हालात खराब
इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार, विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं, जिनमें प्रदूषण के हिसाब से दिल्ली छठे नंबर पर है।
ऐसे रहे बुधवार को दिल्ली में हालात
339 पीपीएम का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) रहा दिल्ली का
600 पीपीएम आंकी गई दो मॉनीटरिंग स्टेशनों पर हवा की शुद्धता
500 पीपीएम तक रहा हवा में प्रदूषण का स्तर अधिकतर मॉनीटरिंग स्टेशनों पर
50 पीपीएम की अधिकतम मात्रा वाली हवा को माना जाता है शुद्ध
301 से 400 के बीच बेहद खराब व 401 से 500 के बीच अति गंभीर होता है स्तर
(केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार)