एनसीआर में विकसित हो ट्रामा सेंटर
विशेषज्ञों का कहना है कि इमरजेंसी सुविधा, तत्काल एडवांस सर्जरी सहित अन्य सुविधा के साथ एनसीआर क्षेत्र में भी ट्रामा सेंटर विकसित होना चाहिए। दुर्घटना के बाद मरीज के लिए हर मिनट कीमती होता है। यदि उसे समय पर इलाज न मिले तो वह ठीक होने के बाद भी दिव्यांग बन सकता है। अंग कटने की स्थिति में चार घंटे के अंदर सर्जरी न हो तो उक्त अंग खराब हो सकता है।
अपने ही घर में गिर रहे बुजुर्ग, टूट रहा कूल्हा
एम्स के ट्रामा सेंटर में आने वाले कुल मरीज में करीब 20 फीसदी बुजुर्ग हैं। इन मामलों में मरीज की कूल्हे की सर्जरी करनी पड़ती है। डॉक्टरों की माने तो अक्सर देखा गया है कि बुजुर्ग देखभाल या दूसरे कारणों से दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। वह अपने घर या दूसरी जगह पर गिर जाते हैं जिसमें उनका कूल्हा तक बदलना पड़ता है। एम्स ट्रामा सेंटर में रोजाना दो से तीन बुजुर्ग की सर्जरी होती है।
लापरवाही है समस्या
निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर बरती गई लापरवाही दुर्घटना का बड़ा कारण बनती है। इसके अलावा सड़क दुर्घटना में भी हेलमेट न पहनना, सड़क नियम का पालन न करना, फुटपाथ पर गाड़ी चलाना, सड़क पर पैदल चलना सहित दूसरे कारणों से हर साल देश में हजारों लोग घायल होते हैं।