दिल्ली में बिछी धूल की चादर
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13 जून को दोपहर तीन बजे दिल्ली-एनसीआर की हवा में पर्टिकुलेट मैटर 10 सामान्य मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से पांच गुना ज्यादा रिकॉर्ड हुआ। शाम 7 बजकर 25 मिनट पर करीब 9 गुना ज्यादा 822 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक रिकॉर्ड किया गया।
ज्यादा महीन और खतरनाक कण पर्टिकुलेट मैटर 2.5 मानक से 4 गुना ज्यादा 230 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक रिकॉर्ड किया गया।
एक हफ्ते के लिए कमजोर मानसून
मौसम विभाग ने बुधवार को बताया कि राजस्थान से दक्षिणी-पश्चिमी और पंजाब की ओर से पश्चिमी गर्म हवाएं दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी भाग को प्रभावित कर रहे हैं। गर्मी और उमस से फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं है।
दक्षिण-पूर्व को छोड़कर करीब एक हफ्ते की देरी से मानसून दक्षिण, मध्य और पूर्वी भारत में दस्तक दे सकता है। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले तीन दिन तक 25 से 30 किलोमीटर गति वाली धूल भरी आंधी की संभावना है। 18 जून तक इन क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहेगा।
दिल्ली में फैली धूल की चादर
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भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के क्षेत्रीय निदेशक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि इस वक्त 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से
धूल भरी चक्रवाती हवाएं चल रही हैं। इनकी जद में दिल्ली, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान हैं।
निजी स्काईमेट के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया कि दक्षिणी अफगानिस्तान और ईरान में आई धूल भरी आंधी की वजह से दिल्ली और आसपास धूल का चैंबर दिखाई दे रहा है। सतह से 20 हजार फुट तक धूल का चैंबर बना हुआ है। सतह पर हवा तेज गति से चल रही है। संभावना है कि यह धूल छंट जाए।
दिल्ली-एनसीआर ऐसे बना धूल का चैंबर
बाहरी कारण -
- ईरान और दक्षिणी अफगानिस्तान में उठे तूफान से आई धूल
- दक्षिण पश्चिम और पश्चिम से आने वाली गर्म और धूल भरी हवा
स्थानीय कारण
- सतह पर तेज गर्म हवा के कारण कुछ ऊंचाई तक उड़ने वाली महीन धूल व अन्य कण
- वाहनों के परिवहन से सुस्त होकर बैठी धूल का सक्रिय होना
कैसे और कब मिल सकती है राहत
धूल का एकमात्र उपाय बारिश है। 16 और 17 तक कुछ बौछारें आने की संभावना है।