वेलकम में महज 350 रुपये लूटने के लिए यूसुफ की हत्या करने वाला नाबालिग कंडक्ट डिसऑर्डर का मरीज हो सकता है। ऐसे मनोरोगी की पहचान आठ साल की उम्र में आसानी से हो सकती है। इस तरह के बच्चे बचपन से ही हिंसक होते हैं और छोटी-छोटी बात पर गुस्सा करते हैं। यदि कोई इनकी बात नहीं मानता तो कुछ भी कर सकते हैं। इनके लिए माता-पिता भी कोई मायने नहीं रखते। यह दूसरों को हमेशा छोटा मानते हैं और छोटी-छोटी बात पर हाथापाई करने पर उतर जाते हैं।
ऐसे मरीजों का यदि समय पर इलाज शुरू हो जाए तो समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मरीजों के लिए इलाज उपलब्ध है। यदि कम उम्र में ही इनका इलाज शुरू हो जाए तो यह काफी हद तक संवेदनशील हो सकते हैं। ऐसा होने से समाज में अपराध कम होगा।
इस बारे में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. लोकेश शेखावत ने कहा कि ओपीडी में कंडक्ट डिसऑर्डर के ऐसे कई मरीज आते हैं। यह मनोरोग की समस्या है और इसे इलाज से ठीक किया जा सकता है। ऐसे मरीजों की पहचान आठ साल की उम्र में की जा सकती है। यदि समय पर इलाज शुरू नहीं किया जाए तो आगे चलकर समस्या गंभीर हो जाती है। वेलकम हत्याकांड में भी आरोपी कंडक्ट डिसऑर्डर का पीड़ित दिख रहा है।
इन चरणों से हो सकती है पहचान ो
- भाई-बहन से मारपीट करना : बच्चा अपने भाई-बहन से मारपीट करता है। उन्हें कुछ नहीं समझता। वह सभी वस्तुओं पर अपना अधिकार जमाता है।
- स्कूल जाना बंद करना : ऐसे बच्चे 10-11 साल की उम्र में स्कूल जाना बंद कर देते हैं। बाहर दोस्तों के साथ घूमते हैं। किसी भी बात पर झगड़ा शुरू कर सकते हैं।
- गलत संगत में पड़ने बनाते हैं गिरोह : ऐसे बच्चे 14 से 15 की उम्र में पहुंचकर गिरोह बनाते हैं। यदि कोई उनकी नहीं सुनता तो मारपीट तक करते हैं।
- परिवार की बात नहीं सुनते : ऐसे बच्चे घर वालों की बात नहीं सुनते। यदि कुछ भी कहते हैं तो उसका उल्टा करते हैं। कई बार ऐसे बच्चे अपने माता-पिता से मारपीट तक करते हैं।
यह होते हैं लक्षण
- बहुत ज्यादा गुस्सा होना
- भावनात्मक हीन होना
- बचपन से हिंसक खेल खेलना
- अधिकार के प्रति सचेत होना, इसके लिए मारपीट करना
- कभी कर्तव्य का पालन न करना
- समाज के नियमों के खिलाफ चलना
- आग से खेलना, दूसरों से मजाक बनाना
- छोटी उम्र में नशे के आदि होना
- चोरी करना
- अपने साथ हमेशा हथियार रखना
- डॉन को अपना गुरु मानना
- व्यवहार में तुरंत बदलाव आना
- बाइक तेज चलाना