- अदालत ने कहा नागरिकों को सुगम और निर्बाध यात्रा के लिए राजमार्ग से वंचित नहीं कर सकते
- ठेकेदार के खिलाफ एनएचएआई ने की थी कार्रवाई, एकल बेंच ने फैसले पर लगादी थी रोक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के एक हिस्से में देरी के कारण ठेकेदार का अनुबंध समाप्त करने के फैसले पर लगी रोक हटा दी है। अदालत ने कहा कि नागरिकों को सुगम और निर्बाध यात्रा के लिए अच्छी तरह निर्मित राजमार्ग से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और विनोद कुमार की पीठ ने 13 जनवरी को एकल न्यायाधीश के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एनएचएआई को 23 दिसंबर 2025 के नोटिस पर कार्रवाई करने से रोका गया था।
ठेकेदार रोडवे सॉल्यूशंस इंडिया इंफ्रा लिमिटेड (आरएसआईआईएल) के खिलाफ यह कार्रवाई थी। पीठ ने स्पष्ट किया कि एनएचएआई अब अपने फैसले पर अमल कर सकती है और गुजरात में विवादित हिस्से के निर्माण के लिए नया टेंडर जारी कर किसी अन्य एजेंसी को नियुक्त कर सकती है। अदालत ने कहा कि रोक लगाने से परियोजना में देरी होगी, जो राष्ट्रीय नुकसान होगा। इससे नागरिकों को 87 किलोमीटर के अपूर्ण हिस्से के लिए डिटूर लेना पड़ता है, जो या तो अपूर्ण है या दोनों पक्षों की गलती से धीमी गति से चल रहा है। अदालत ने जोड़ा कि कौन सी पार्टी दोषी है, यह मध्यस्थता कार्यवाही में तय होगा।
एनएचएआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ठेकेदार को 2024 में तीन पैकेज दिए गए थे, लेकिन कार्य पूरा न करने से कुल 794 किमी राजमार्ग में 87 किमी अपूर्ण है। यात्रियों को डिटूर लेना पड़ता है। वर्तमान मामला गुजरात में 35 किमी हिस्से से संबंधित है। मेहता ने कहा कि रोक न हटने पर एनएचएआई समय पर परियोजना पूरी करने के लिए नया ठेकेदार नहीं नियुक्त कर पाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि ठेकेदार ने खुद 18 दिसंबर 2025 को अनुबंध समाप्ति का नोटिस जारी किया था, जिसमें एनएचएआई पर सतत भूमि उपलब्ध न कराने का आरोप लगाया गया था।